जयपुर। छोटी काशी में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी सोमवार को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। गणेश मंदिरों सहित घर-घर में गणेशजी की पूजा-अर्चना होगी। सोमवार को मध्याहृ काल में चतुर्थी होने से इस दिन महागणपति चतुर्थी मनाई जाएगी। गणेश स्थापना से ही गणेशोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। 10 दिन के बाद अनन्त चतुर्दशी के दिन उत्सव पूर्ण होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित रवि शर्मा ने बताया कि गणेश जी के लिए शास्त्रों में दोपहर मध्यकाल श्रेष्ठ माना गया है, जो इस दिन दोपहर 11:11 से 1:42 बजे तक रहेगा। दोपहर 11 :51 से 1:42 बजे तक वृश्चिक लग्न और भी श्रेष्ठ रहेगा। इसके अलावा श्रेष्ठ चौघड़िया मुहूर्त में भी गणेश जी का पूजन किया जा सकता है। अमृत का चौघडिय़ा – सुबह 06:10 बजे से सुबह 07:44 बजे तक रहेगा। शुभ का चौघड़िया- सुबह 09:18 बजे से सुबह 10:52 बजे तक व चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया- दोपहर 2 बजे से शाम 6:43 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा।
गणेश चतुर्थी के दिन घर पर भगवान गणेश की एक प्रतिमा को एक लाल कपड़े पर विधि विधान से उसकी स्थापना करें। भगवान गणेश की पूजा करें और मोदक के लड्डू चढ़ाएं। शाम को भगवान गणेश की पूजा करने के साथ उनकी आरती गाएं।
आपको बता दें गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि व बुद्धि का दाता भी माना जाता है। मान्यता है कि गुरु शिष्य परंपरा के तहत इसी दिन से विद्याध्ययन का शुभारंभ होता था। इस दिन बच्चे डण्डे बजाकर खेलते भी हैं। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में इसे डण्डा चौथ भी कहते हैं।