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जैन धर्म में इस पूजा के करने से दूर हो जाता है कुष्ठ रोग!

आठ दिन मनाया जाने वाला शाश्वत पर्व अष्टाह्निक जैन धर्म में विशेष स्थान रखता है।

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mahaveer swami

जयपुर। जैन धर्म का शाश्वत पर्व अष्टाह्निक शुक्रवार से शुरू हो रहा है। आठ दिन मनाया जाने वाला यह पर्व जैन धर्म में विशेष स्थान रखता है। आठ दिन का यह पर्व, वर्ष में तीन बार मनाया जाता है। इस दौरान जैन मंदिरों में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, सिद्धचक्र मंडल विधान, नन्दीश्वर विधान मंडल पूजा सहित अन्य विशेष पूजाओं का आयोजन होगा। शाम को आरती, भक्ति संध्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान जैन मंदिरों में धर्म की बयार बहेगी। अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाए जाने वाला यह पर्व 27 जुलाई तक चलेगा।

तप से किया था रोग निवारण

अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन परिषद् के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया भगवान महावीर स्वामी को समर्पित यह पर्व जैन धर्म के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। अष्टाह्निका महापर्व वर्ष में तीन बार कार्तिक, फाल्गुन एवं आषाढ़ में मनाया जाता है। जैन धर्म में मान्यता के अनुसार इस पर्व की शुरुआत मैना सुन्दरी द्वारा अपने पति श्रीपाल के कुष्ठ रोग निवारण के लिए आठ दिनों तक सिद्धचक्र विधान मंडल एवं तीर्थंकरो के अभिषेक जल के छीटों से रोग समाप्त होने के कारण सदियों पूर्व हुई। इसका जैन ग्रथों में भी उल्लेख मिलता है। आठ दिनों में जैन धर्म का पालन करने वाले, ध्यान एवं आत्मा की शुद्धि के लिए कठिन तप-व्रत आदि करते हैं। इस समय किसी भी प्रकार की विधियों से, बुरी आदतों से, बुरे विचारों से अपने को मुक्त करने का प्रयास किया जाता है।
ऐसा भी माना गया है की सिद्ध पुरुषों एवं ज्ञानियों का स्मरण कर उनके प्रशस्त मार्ग में आगे बढ़ने से व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी आपदाएं भी चुटकियों में समाप्त हो जाती हैं। पद्मपुराण में भी इस पर्व को मनाने का विवरण है। सिद्ध चक्र का अनुसरण करने से कई कुष्ठ रोगियों को भी अपने रोग से मुक्ति मिल गयी थी।