
Kokila Vrat Pooja Vidhi Vrat katha Mata Parwati Puja 4 july 2020
जयपुर. संतानसुख, संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए 4 जुलाई का दिन बहुत खास है. इस दिन आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है. इस तिथि को कोकिला व्रत प्रारंभ किया जाता है. इस व्रत में आदिशक्ति माता पार्वती की कोयल रूप में पूजा की जाती है। दक्षिण भारत में यह व्रत आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से लेकर सावन मास की पूर्णिमा तक रखने का विधान है। हालांकि उत्तर भारत में ज्यादातर महिलाएं चतुर्दशी को ही व्रत रखकर यह पर्व मनाती हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि इस व्रत को रखने वाली महिलाओं को सौभाग्य, संतान और संपत्ति की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत को विश्वासपूर्वक करने से मन के अनुरूप शुभ फलों की प्राप्ति जरूर होती है। विशेषकर किशोरियों, युवतियों को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। उनकी शादी में आ रही दिक्कतें दूर होती हैं और योग्य वर मिलता है। विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत दांपत्य जीवन को सुखमय बना देता है।
कोकिला व्रत की कथा का संबंध शिव पुराण से है। ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश शर्मा के अनुसार इसमें बताया गया है कि जब देवी सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ के हवन कुंड में अपनी देह का त्याग कर देती हैं तो शिवजी उनका वियोग नहीं सह पाते हैं. वे माता सती से रुष्ट होकर अपनी इच्छा के विरुद्ध जाकर यज्ञ में जाकर प्राणों को त्यागने पर उन्हें हजार वर्षों तक कोयल बनने का शाप दे देते हैं। इस पर माता कोयल बनकर भगवान शिव को पुन: पाने के लिए सदियों तक तप करती हैं। इसके फलस्वरूप उन्हें पार्वती रूप में शिवजी की प्राप्ति होती है।
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Published on:
04 Jul 2020 08:16 am

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