तकनीकी शिक्षा में नित नए कॉलेज और यूनिवर्सिटी खुल रही हैं। नित नए कोर्स जुड़ रहे हैं या अपडेट हो रहे हैं, लेकिन उस हिसाब से फैकल्टी नहीं मिल रही। निजी कॉलेजों के प्रतिनिधि तो यह बात पहले ही कहते रहे हैं, लेकिन आरटीयू ने यह बात अब मानी है।
विवि को गेस्ट फेकल्टी के पदों के लिए अनुभवी और राजकीय सेवा में कार्यरत शिक्षक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में नए अभ्यर्थियों को अवसर दिया जा रहा है। इस बारे में आरटीयू राजभवन से औपचारिक स्वीकृति भी मांगेंगी।
जून माह में होने वाली कुलपति समन्वय समिति की बैठक में आरटीयू की तरफ से इस बाबत प्रस्ताव रखा जाएगा कि सेवानिवृत्त और राजकीय सेवा में कार्यरत शिक्षक नहीं मिलने की स्थिति में गेस्ट फेकल्टी के रूप में नए अभ्यर्थियों को रखा जाना चाहिए।
आदेश हैं, लेकिन...
राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में गेस्ट फेकल्टी या इस तरह के अन्य कार्यों के लिए सेवानिवृत्त व राजकीय सेवा में कार्यरत लोगों को ही लगाने के लिए स्पष्ट आदेश किया हुआ है। इस सूची में आरटीयू को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन सरकार का अंग होने के कारण यह स्थिति हो सकती है इसलिए यह प्रस्ताव कुलाधिपति के समक्ष रखा जाएगा।
इसलिए नहीं मिलते अनुभवी
सरकारी कॉलेजों से सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को निजी यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में बड़े पदों पर कार्य करने का अवसर मिल जाता है। ऐसे में वे सरकारी क्षेत्र में गेस्ट फेकल्टी बनने में रुचि नहीं दर्शाते।
हर वर्ष करीब सौ गेस्ट फेकल्टी लगाते हैं। सभी गवर्नमेंट कॉलेज में रिक्त पदों के विरूद्ध जरूरत रहती है। इसीलिए प्रपोजल के जरिए स्वीकृति लेंगे।
प्रो.राजीव गुप्ता,
प्रति कुलपति
गेस्ट फैकल्टी के संदर्भ में वित्त समिति की बैठक में निर्णय लिया गया है। जून में होने वाली समन्वय समिति में प्रस्ताव भेजेंगे।