
कुल हिंद ख्वातीन मुशायरे में देशभर की शायरात ने जमाया रंग
कुल हिंद ख्वातीन मुशायरे में देशभर की शायरात ने जमाया रंग
रवीन्द्र मंच पर चार दिवसीय उर्दू ड्रामा फेस्टिवल शुरू
जयपुर। रवीन्द्र मंच पर देशभर से शामिल हुई शायरात ने अपनी रचनाओं से ऐसा रंग जमाया कि तालियों की गडग़ड़ाहट ने रुकने का नाम ही नहीं लिया। मौका था कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग,रवीन्द्र मंच सोसायटी और राजस्थान उर्दू अकादमी की ओर से आयोजित हुए कुल हिंद ख्वातीन मुशायरा का। मुशायरे में शिक्षा एवं कला.संस्कृति मंत्री डॉ. बीडी कल्ला बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
शायरात ने यह रचनाएं सुनाकर बनाया जादुई माहौल
मुशायरे में जयपुर की शोभा चंदर ने जब ऐतबार के मौसम कऱीब होते हैं, तो अपने लोग ही अपने रकीब होते हैं, सुनाया। दिल्ली की मुमताज नसीम ने अपनी रचना मैं ख़ुद ही आज अपने इंतिखाब मैं उलझ गई तेरे खय़ाल से बची तो ख़ाब मैं उलझ गई, से कार्यक्रम में चार चांद लगाए। कानपुर से आईं चांदनी पाण्डेय ने अपनी रचना तुम जो होते तो बात कुछ होती अबके बारिश तो सिर्फ पानी है पेश की। इसके अलावा फौजिया राबाब ने इश्क भी करना है घर के काम भी, ये मुसीबत भी नई है इन दिनों, अंजुम रहबर ने मिलना था इत्तफाक बिछडऩा नसीब था, वह उतनी दूर हो गया जितना करीब था नुसरत अतीक़ गोरखपुरी ने पहले तो दिल से दिल को मिलाने की बात थी अब हुक्म ये हुआ है कि दूरी बनाए लोग, डॉ. कमर सुरूर ने मुझे महफूज रखता है हमेशा हर मुसीबत में, अगर वो रब नहीं, तो यह इनायत कौन करता है, सबा बलमपुरी ने वादे जो किए तुझसे सौ बार निभाऊंगी, उर प्यार मोहोब्बत के दीप जलाऊंगी और डॉ.कीर्ति काले ने अपनी रचना गर्म तपती दोपहर है लड़कियों की जिन्दगी, एक पथरीली डगर है लड़कियों की जिन्दगी सुनाकर माहौल को जादुई बना दिया।
Published on:
05 Mar 2022 09:30 pm
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