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डाइट में विटामिन ए की कमी से बच्चों की आंखों की रौशनी पर पड़ रहा है असर

कम उम्र में बच्चों को पौष्टिक आहार देना जरुरी है। डाइट में सभी विटामिन का सेवन सही मात्रा में होना चाहिए। आंखों के लिए भी विटामिन बेहद जरूरी है खासतौर पर विटामिन ए जो आंखों की रौशनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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डाइट में विटामिन ए की कमी से बच्चों की आंखों की रौशनी पर पड़ रहा है असर

डाइट में विटामिन ए की कमी से बच्चों की आंखों की रौशनी पर पड़ रहा है असर

कम उम्र में बच्चों को पौष्टिक आहार देना जरुरी है। डाइट में सभी विटामिन का सेवन सही मात्रा में होना चाहिए। आंखों के लिए भी विटामिन बेहद जरूरी है खासतौर पर विटामिन ए जो आंखों की रौशनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन ज्यादातर बच्चें हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खाते है , सब्जियां ना खाने पर बच्चों को माता -पिता उनका पसंदीदा भोजन या जंक फूड खिला देते है। जिस कारण बच्चों के शरीर में कम उम्र से ही विटामिन ए की कमी होने लगती है।यह समस्या शहरी बच्चों के साथ ग्रामीण बच्चों में भी पायी जा रही है।

यह कहती है रिपोर्ट
एनसीबीआइ (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन )की एक रिपोर्ट के अनुसार 30 %बच्चें जीरोफ्थैल्मिया के शिकार है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें विटामिन ए की कमी से आंखों में सूखापन आ जाता है। इस से बच्चों की देखने की क्षमता कम होने लगती है। रौशनी पर असर पड़ता है साथ ही यह आंखों के कॉर्निया को भी नुक्सान पहुंचता है। इस समस्या से बच्चों की आंखों में सफेद धब्बे दिखने लगते है।

बच्चों के आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां और कलर्ड फ्रूट है बेहद जरुरी
विटामिन ए आंखों की अंतर्निर्मित संरचना के लिए बहुत जरुरी होता है।बच्चों में विटामिन ए की कमी बेहद आम होती जा रही है। आंखों में रेटिनल पिग्मेंट की बनावट से लेकर कॉर्निया लेवल तक आंखों को पूरा पोषण विटामिन ए के माध्यम से ही मिलता है। लेकिन ज्यादातर बच्चों के खाने में विटामिन होते ही नहीं है। इस लिए कम उम्र से ही बच्चों को धुधंला दिखना ,आंखों की रौशनी कम होना ,जलन की समस्या हो रही है। रोजाना ऐसे 3 से 4 मामलें सामने आ रहे है जहां विटामिन की कमी के कारण बच्चों को देखने में दिक्कत हो रही है। विटामिन ए में मौजूद प्रोटीन रेटिनॉल के कारण ही हमारा कलर विजन बनता है। इसलिए बच्चों के आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां और प्राकृतिक रंगीन फ्रूट का होना जरूरी है। आंखों में सूखापन जलन ,बाहरी परत पर निशान होना इसके शुरूआती लक्षणों में शामिल है। अक्सर इन लक्षणों को माता -पिता नजरअंदाज कर देते है। दवाई और थेरेपी से जीरोफ्थैल्मिया का इलाज मुमकिन है।
डॉ अनुभूति शर्मा (नेत्र रोग विशेषज्ञ )

ऐसे मामलें आ रहे है सामने

केस 1

8 साल की उम्र में ही देखने में हो रही है समस्या

सुभाष नगर निवासी महिला ने बताया उनका बेटा 8 साल का है। उसे सब्जियां खाना पसंद नहीं है। वह ज्यादातर फास्ट फूड खाता है। इस कारण उसके शरीर में काफी पौष्टिक तत्वों और विटामिन की कमी होने लगी। जांच से पता चला की विटामिन ए ,और सी की कमी है। अभी फिलहाल बच्चें का इलाज चल रहा है और उसे विटामिन से भरपूर खाना दिया जा रहा है।

केस 2

कॉर्निया में बन गया घाव
एमआई रोड निवासी 15 वर्षीय युवा ने बताया कि उन्हें काफी समय से आंखों में जलन हो रही थी। देखने में भी तकलीफ होने लगी। धीरे -धीरे उनके कॉर्निया में घाव बन गया। डॉक्टर से परामर्श पर पता चला की उनकी आंखों में जीरोफ्थैल्मिया की समस्या बढ़ चुकी है जिस कारण घाव बन रहा है जो कॉर्नियल अल्सर की शुरुआत थी। अभी वे थेरपीज और इंजेक्शन पर निर्भर है।