जात-पांत के बंधन को दरकिनार कर जिसके साथ अग्नि के सात फेरे लेकर जिन्दगीभर साथ निभाने का वचन लिया वही उसे मझधार में छोड़ गया।
जात-पांत के बंधन को दरकिनार कर जिसके साथ अग्नि के सात फेरे लेकर जिन्दगीभर साथ निभाने का वचन लिया वही उसे मझधार में छोड़ गया। अब विवाहिता अपने छह माह के दुधमुंहे बच्चे को लेकर शहर की सड़कों पर भटक रही है। उसे उम्मीद है कि अजमेर शहर में उसका खोया पति फिर से मिल जाएगा।
जोधपुर के महामंदिर क्षेत्र की रहने वाली नगीना ने 13 मार्च 2014 को जोधपुर के सूरसागर कालूराम जी की बावड़ी इलाके में रहने वाले महेन्द्र परिहार से शादी रचा ली। नगीना पुत्र होने के बाद पांच माह पहले महेन्द्र के साथ अजमेर आई थी। महेन्द्र ने पहले वैन चलाकर गुजर-बसर किया। फिर केसरगंज क्षेत्र में एक ब्रांडेड कपड़े के शोरूम में नौकरी कर ली। यहीं उसने कमरा किराये पर ले लिया। कुछ दिन तो सब कुछ ठीक-ठाक चला लेकिन पिछले दिनों बच्चे की तबीयत खराब होने पर महेन्द्र उसे जयपुर लेकर चला गया। वहां एसएमएस अस्पताल के पीछे कल्याण भवन मोतीडूंगरी में रहने लगे। इस बीच महेन्द्र 28 मार्च को बिना बताए घर से निकला तो वापस नहीं लौटा। उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है।
अजमेर शहर में ही है महेन्द्र!नगीना ने बताया कि कई जगह तलाश करने के बाद उसने मोती डूंगरी थाने में महेन्द्र की गुमशुदगी दर्ज करवाई। नगीना को उम्मीद है कि महेन्द्र जयपुर से निकलने के बाद अजमेर आ गया। संभवत: वह अजमेर शहर में ही रह रहा है।
बचपन में माता-पिता ने छोड़ा
नगीना ने बताया कि वह 13 साल की थी तब उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई। जोधपुर में बुआ ने जैसे-तैसे उसका पालन-पोषण किया। डेढ़ साल पहले आपसी मेल-मिलाप के बाद उसकी शादी महेन्द्र से हुई। वह पति के साथ ससुराल आ गई लेकिन यहां भी कुछ दिन रहने के बाद दोनों अजमेर आ गए।
अब रेलवे स्टेशन है बसेरा
नगीना ने बताया कि अब रेलवे स्टेशन ही उसका बसेरा है। उसका कहना है कि उसके खून के रिश्ते में कोई नहीं है जो है उनको उसकी जिन्दगी से कोई मतलब नहीं है। अब वह जाए तो कहां जाए। ऐसे में स्टेशन के आसपास फुटपाथ पर अपने नवजात के साथ जिन्दगी बसर कर रही है। उसे उम्मीद है कि कभी तो महेन्द्र की उस पर नजर पड़ेगी और वह उसे अपने साथ ले जाएगा।