
Firing
देवेन्द्र शर्मा शास्त्री
जयपुर। रंगदारी हो या वसूली। रंजिश हो या गैंगवार। गोलीबारी में अपराधी अवैध हथियारों का उपयोग कर रहे है। यह जगजाहिर है। लेकिन इसका दूसरा पक्ष यह है कि अवैध हथियारों में डलने वाले कारतूस वैध होते हैं। यहां तक की सेना और पुलिस की ओर से उपयोग लिए जाने वाले प्रतिबंधित हथियारों का भी जमकर उपयोग किया जा रहा है। अपराधियों के पास अवैध हथियार यूपी और एमसी से आ रहे हैं, लेकिन वैध कारतूस अपराधियों के पास कहां से पहुंच रहे हैं। पुलिस अभी तक इस नेटवर्क का पता नहीं लगा पाई है।
पुलिस को मिली 45 मैगजीन, 2025 कारतूस
पुलिस की ओर से चलाए गए आॅपरेशन आग के तहत जयपुर शहर में की गई कार्रवाई की स्थिति को देखे तो सामने आता है कि गिरफ्तार अपराधियों से पुलिस ने 45 मैग्जीन, 2025 जिंदा और 180 खाली कारतूस के खोखे बरामद किए हैं। पुलिस कार्रवाई में सेना और पुलिस की ओर से उपयोग में लिए जाने वाले .38, 9एमएम, 315,303 बोर के कारतूस भी मिले हैं। शहर में हुई फायरिंग की वारदातों में भी प्रतिबंधित बोर के कारतूस का उपयोग आम हो गया है।
कारतूस की सप्लाई पर रोक से रुकेगा अपराध
पुलिस ध्यान अवैध हथियार तस्करी को रोकने पर है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि कारतूस की तस्करी पर रोक लगाने पर ही अपराध में कमी आ सकेगी। अवैध हथियार सामान्य संशाधनों से बनाए जा सकते हैं, लेकिन कारतूस का निर्माण देसी या विदेशी ऑर्डिनेंस फैक्टरी में ही हो सकता है। सामान्य कारतूस हथियार डीलर की ओर से लाइसेंसशुदा हथियारधारी को ही बेचे जा सकते हैं। ऐसे में इस माध्यम से भी कारतूस अपराधियों तक पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
आॅपरेशन आग बरामद कारतूसों पर एक नजर
मैगजीन—45, जिंदा कारतूस—2025, खालीकारतूस—180
Published on:
19 May 2023 11:48 am
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