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लोकतंत्र में विधायिका सर्वोच्च, कानून बनाने का अधिकार उसी के पास: बिरला

- न्यायपालिका के दखल पर फिर बोले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सभी संस्थाओं को मर्यादा में रहना जरूरी - विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने कहा...न्यायपालिका को कानून की समीक्षा का अधिकार लेकिन गाइड करने का नहीं

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जयपुर. अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों को सम्मेलन गुरुवार को खत्म हो गया। यह सम्मेलन कई मायनों में याद रखा जाएगा, लेकिन एक विशेष कारण से इसे लम्बे समय तक याद रखा जाएगा। इस दो दिवसीय सम्मेलन में न्यायपालिका पर उठाए गए सवाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहे।
सम्मेलन के समापन के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने पत्रकारों से बातचीत की और सम्मेलन में पारित किए गए 9 प्रस्तावों पर चर्चा की, लेकिन पत्रकार वार्ता में भी मुद्दा न्यायपालिका के दखल का ही छाया रहा। ओम बिरला ने एक बार फिर न्यायपालिका के प्रति सम्मान दिखाते हुए कहा कि विधायिका सर्वोच्च है और उसे ही कानून बनाने का अधिकार है। न्यायपालिका को उस कानून की समीक्षा का अधिकार तो है, लेकिन गाइड करने का नहीं। न्यायपालिका का सम्मान है, लेकिन अपेक्षा है कि संवैधानिक परम्पराओं का सम्मान किया जाए। आपसी सामंजस्य से काम किया जाए। कार्यपालिका की जवाबदेही भी तय होना जरूरी है।

इसी तरह विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने भी कहा कि विधानसभा की कार्रवाई के बीच में न्यायपालिका दखल नहीं कर सकती। कोई निर्णय होता है तो उस पर न्यायपालिका दखल दे सकती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की प्रोसिडिंग के समय न्यायपालिका दो दखल देने का अधिकार नहीं है। तय समय में निर्णय के सवाल पर जोशी ने कहा कि दसवीं अनुसूची में ऐसी कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। न्यायपालिका में भी निर्णय करने के लिए कौनसा समय तय किया गया है?
लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हो, इस पर चर्चा की
ओम बिरला ने पत्रकारों से कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं संशक्त, मजबूत हो। जवाबदेही तय हो। जनता का विश्वास इन संस्थाओं पर बढ़े। इस पर मंथन किया। सदनों में शालीनता, गरिमा कम होती जा रही है। सभी विधानसभाओं के अध्यक्ष अपने-अपने राज्यों में राजनीतिक दलों से चर्चा कर कोशिश करेंगे कि प्रश्नकाल-शून्यकाल में हंगामा ना हो और सदन स्थगित न हो।
वित्तीय स्वायत्ता पर सहमति: जोशी
विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने कहा कि विधानसभा को वित्तीय स्वायत्ता की सहमति देने की सीएम ने मंजूरी दे दी है। उनका इसके लिए धन्यवाद है। जोशी ने कहा कि एक बार बजट आवंटित हो जाता है, उसके बाद बार-बार बजट खर्च की मंजूरी के लिए सरकार को फाइल भेजने का कोई औचित्य नहीं है। यह अधिकार अध्यक्ष के पास ही होना चाहिए।