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कभी इंसानों के रहने योग्य था मंगल ग्रह का वातावरण

नया शोध : प्राचीन जीवों ने उस तंत्र को ही खा लिया, जो रोककर रखता था गर्मी को ग्रीनहाउस गैसों पर ज्यादा निर्भर था लाल ग्रह पर जीवन

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जयपुर

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Aryan Sharma

Oct 16, 2022

कभी इंसानों के रहने योग्य था मंगल ग्रह का वातावरण

कभी इंसानों के रहने योग्य था मंगल ग्रह का वातावरण

वॉशिंगटन. नए शोध से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन से बर्बाद होने से पहले मंगल ग्रह पर प्राचीन वातावरण इंसानों के रहने योग्य था। यह शोध नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित जलवायु मॉडलिंग स्टडी का समर्थन करता है, जिसमें अरबों साल पहले मंगल ग्रह पर रहने वाले सूक्ष्म जीवों पर अध्ययन किया गया था। तब लाल ग्रह का वातावरण आज की पृथ्वी जैसा था। माना जाता है कि सूक्ष्म जीवों का जीवन मंगल ग्रह का वातावरण बदलने के कारण समाप्त हो गया।
अध्ययन में पाया गया कि पृथ्वी पर जीवन पनपने और मंगल पर खत्म होने का कारण दोनों ग्रहों की गैस संरचना तथा सूर्य से उनकी दूरी में अंतर था। चूंकि मंगल सूर्य से बेहद दूर है, इसलिए वहां जीवन उसके वातावरण में मौजूद ग्रीनहाउस गैसों पर ज्यादा निर्भर था। ये तापमान को जीवन योग्य बनाए रखती थीं। शोध के मुताबिक, मंगल पर प्राचीन सूक्ष्म जीवों ने हाइड्रोजन का उपभोग और मीथेन का उत्पादन किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने ग्रह के उस तंत्र को ही खा लिया, जो गर्मी को रोककर रखता था।

इतना ठंडा हुआ, सारे जीव गायब हो गए
शोध के मुताबिक, जब मंगल पर जीवन पनप रहा था, इसका औसत तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस रहा होगा। जैसे-जैसे सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती गई, तापमान माइनस 57 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। इससे धीरे-धीरे यह ग्रह निर्जन हो गया। खगोल जीव विज्ञानी और इस शोध के मुख्य लेखक बोरिस सौतेरे ने कहा कि जीवन के तत्त्व ब्रह्मांड में हर जगह मौजूद हैं।


ब्रह्मांड में जीवन का आना-जाना
बोरिस सौतेरे का कहना है कि ब्रह्मांड में जीवन नियमित रूप से प्रकट होता रहता है, लेकिन ग्रह की सतह पर रहने योग्य परिस्थितियों की प्रतिकूलता इसे विलुप्त कर देती है। अमरीका और चीन मंगल पर खोजी अभियान चला रहे हैं। प्राइवेट कंपनी स्पेसएक्स मंगल पर इंसानों को भेजने का सपना देख रही है।