
विकास जैन
जयपुर। हेल्दी डाइट और संयमित दिनचर्या अपनाना सेहत के लिए हमेशा से फायदेमंद माना जाता रहा है। लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण युवाओं के लिए यह संभव नहीं हो पाता और वे बीपी, शूगर और विभिन्न ह्दय रोगों के शिकार हो जाते हैं। इसके बावजूद इनमें से करीब 30 से 40 प्रतिशत युवा ऐसे हैं, जिन्होंने संयमित दिनचर्या और आहार से अपनी बीमारी को आगे बढ़ने से रोक दिया है। इनमें भी करीब 50 प्रतिशत ऐसे हैं, जो इन बीमारियों पर पूरी तरह नियंत्रण पाकर फिलहाल दवाइयों से मुक्ति पा चुके हैं।
राजधानी के प्रमुख ह्दय रोग विशेषज्ञों के अनुसार उनके पास रोजाना आने वाले नए मरीजों में से करीब 30 से 40 प्रतिशत मरीज 30 से 40 वर्ष आयु के हैं और बीमारी के शुरूआती चरण में ही उनके पास आते हैं। इन मरीजों के लिए संयमित दिनचर्या और आहार का फार्मुला कारगर रहता है। इनमें से करीब 50 प्रतिशत तो रात्रिकालीन भोजन का त्याग करने से भी परहेज नहीं कर रहे। देर रात घर लौटकर संपूर्ण भोजन लेने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह अनुसार ही वे हल्के खाद्य पदार्थ ही ले रहे हैं। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक ज्यादा वजन वाले लोगों को टाइप -2 डायबिटीज और हाइपरटेंशन का खतरा होता है, जिससे उन्हें हृदय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
35 से 45 आयु के बीच 20 प्रतिशत को हॉर्ट अटैक की आशंका
हृदय रोग शुरू होने की सबसे सामान्य आयु 35 से 45 वर्ष मानी गई है। इस आयु में करीब 15 से 20 प्रतिशत लोगों को हॉर्ट अटैक आने की आशंका रहती है। यही वह समय है, जब एहतियात बरना शुरू कर दिया जाए तो बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
उपाय जब कर पाएंगे, जब समय पर पहचान होगी
सवाईमानसिंह अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.शशि मोहन शर्मा के अनुसार पहले चरण में पता लगाने के लिए समय पर इसकी पहचान भी जरूरी है। चिकित्सा जर्नल्स के मुताबिक 40 वर्ष की आयु आते-आते समय समय पर लिपिड प्रोफाइल व हृदय से संबंधित आवश्यक जांचें करवानी चाहिए। अब यह सभी जांचें राज्य के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध हैं।
बेस्ट फार्मुला : पता लगते ही जागरूक लोग हो रहे सजग
विशेषज्ञों के अनुसार 30 से 45 आयु के बीच युवा भले ही अत्यधिक व्यस्त रहते हों, लेकिन बीमारी का पता चलने पर इनमें से अधिकांश सजग हो जाते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद जागरूक लोगों का यह तबका अपनी दिनचर्या में मॉर्निंग वॉक, व्यायाम, प्राणायाम और योगा को शामिल कर रहा है। जिससे उनके सामने सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। यहां तक की धूम्रपान और शराब से भी वे दूरी बना लेते हैं।
संपूर्ण नियंत्रण तभी संभव, जब पहले चरण में पता चले
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.जी.एल.शर्मा के अनुसार पिछले एक महीने में ही उनके पास करीब 10 केस ऐसे आए हैं, जिनके हृदय की बीमारी पहले चरण में थी। लेकिन समय पर जांच से उन्होंने अपनी लाइफ स्टाइल को सुधार लिया। वे नियमित कई किलोमीटर पैदल चलते हैं, अपनी सामर्थ्य के अनुसार दौड़ लगाते हैं। इसके साथ ही संयंमित दिनचर्या से उनकी यह बीमारी अब दूर हो चुकी है। इन्हें दवाइयों की भी अब आवश्यकता नहीं है।
हृदय रोग के कुछ तथ्य
- 25 प्रतिशत मौतों का जिम्मेदार
- प्रति 1 लाख जनसंख्या पर 272 को यह बीमारी
- तंबाकू का सेवन इसका प्रमुख जोखिम कारण
- प्रदूषण और आनुवंशिकता
- खराब खाने की आदतें और ताजे फल-सब्जियां कम खाना
- पर्याप्त नींद की कमी और अत्यधिक तनाव
Published on:
17 Dec 2022 07:30 pm
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