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रिणवां को खान घोटाले में फंसाने के लिए पायलट-गहलोत ने पांच साल मचाया हंगामा, मिले तो बोले हम साथ-साथ है

खान घोटाले को कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में भी बनाया था मुद्दा

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rajkumar rinwa and ashok gehlot

रिणवां को खान घोटाले में फंसाने के लिए पायलट-गहलोत ने पांच साल मचाया हंगामा, मिले तो बोले हम साथ-साथ है

सुनील सिंह सिसोदिया / जयपुर-चूरू। राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में खान मंत्री रहे राजकुमार रिणवा ( Rajkumar Rinwa ) को कांग्रेस पार्टी ने अब अपने साथ ले लिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot ) और उप मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ( Sachin Pilot ) की मौजूदगी में राजकुमार रिणवा ने गुरुवार को चुरू में कांग्रेस का हाथ थाम लिया। उन्होंने गहलोत व पायलट ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई।

रिणवा वहीं हैं, जिनके मंत्री रहते प्रदेश में महाखान घोटाले हुए। कांग्रेस ने इस घोटाले को पूरे पांच साल जोर-शोर से उठाया। राजस्थान ही नहीं दिल्ली तक में सीएजी और सीबीआई से जांच कराने को लेकर गहलोत, पायलट और प्रदेश कांग्रेस के केन्द्रीय नेताओं ने परेड की थी। इस घोटाले को कांग्रेस 1 लाख करोड़ का बताया था। हालांकि इस मामले की जांच आज भी लोकायुक्त में लंबित है। हाल ही राज्य के सम्पन्न हुए विधानसभा चुनावों में यह बड़ा मुद्दा रहा था। लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस इसका जिक्र कर चुकी है। लेकिन अब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस पर कम बोल रहे हैं।

इतना ही नहीं विधानसभा में भी विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने रिणवा को कई बार घेरा और घोटाले को लेकर सवाल-जबाव किए। हंगामे की कई बार विधानसभा भेंट चढ़ी। लेकिन लोकसभा चुनाव में बाजी मारने को लेकर कांग्रेस ने अब शायद इस घोटाले को भुला दिया है।

चूरू के पुलिस लाइन मैदान में कांग्रेस प्रत्याशी रफीक मंडेलिया की नामांकन रैली में शामिल होने आए मुख्यमंत्री गहलोत और उप मुख्यमंत्री पायलट पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने पूर्व खान मंत्री राजकुमार रिणवा का कांग्रेस का दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया और कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई। रिणवा हाल ही विधानसभा चुनाव में टिकट कटने पर भाजपा से बगावत कर रतनगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे।

बताया जा रहा है कि रिणवा ने वर्ष 2003 में कांग्रेस का टिकट मांगा था, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे और चुनाव जीत गए। इसके बाद 2008 और 2013 के दोनों चुनाव भाजपा की टिकट पर लड़े और जीते। 2018 में रिणवा का स्थानीय स्तर पर विरोध होने के चलते भाजपा ने टिकट काट दिया था। इस पर वे बागी होकर चुनाव मैदान में निर्दलीय के रूप में उतरे और चुनाव हार गए।