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टेंडर वोट: आपका वोट किसी ने कर दिया पोल, तो भी आप कर सकते है मतदान, ये है प्रक्रिया

फर्जी वोट से बचने के लिए सुबह जल्दी करें मतदान नहीं तो टेंडर अपनाएं

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टेंडर वोट: आपका वोट किसी ने कर दिया पोल, तो भी आप कर सकते है मतदान, ये है प्रक्रिया

विजय शर्मा / जयपुर। निर्वाचन विभाग ( Election department ) की कड़ी सख्ती के बाद भी फर्जी मतदान ( fake voting ) का सिलसिला नहीं रुक रहा है। इस बार लोकसभा चुनाव ( Loksabha Election ) के राज्य में हुए पहले चरण के चुनाव में यह आंकड़ा सामने आया है। इसी को देखते हुए निर्वाचन विभाग ने 6 मई को दूसरे चरण के मतदान में फर्जी वोट से मायूस मतदाताओं के लिए कार्मिकों की विशेष ट्रेनिंग शुरू कर दी है। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।

मास्टर ट्रेनर्स पोलिंग पार्टियों को टेंडर वोट ( Tender Vote ) की जानकारी प्रशिक्षण में ट्रेनिंग दे रहे हैं। मतदाता गलती या इरादतन दूसरे का वोट डाल देता है तो वास्तविक मतदाता को वोट डालने का मौका मिलेगा। पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार अधिक फर्जी मतदान हुआ है। पिछली चुनाव में जहां 33 जिलों में 539 टेंंडर वोट डाले गए, वहीं इस बार पहले चरण में 13 लोकसभा सीटों पर ही फर्जी मतदान की संख्या 549 रही। 2009 की बात करें तो उस समय 715 टेंडर वोट डाले गए थे।

बचने के लिए करें सुबह जल्दी मतदान या फिर टेंडर वोट
जयपुर एडीएम द्वितीय पुरूषोत्तम शर्मा का कहना है कि मतदान केन्द्रों पर अगर फर्जी मतदान हुआ है तो उसके लिए मतदाता जिम्मेदार नहीं है। पोलिंग एजेंट और पीठासीन अधिकारी जिम्मेदार है। ऐसी स्थिति में मतदाता सुबह जल्दी जाकर अपना वोट डालकर आए। ताकि उसका वोट फर्जी नहीं डल सके। इसके अलावा अगर किसी का वोट फर्जी डल गया है तो उसे बैरंग लौटने की जरूरत नहीं। मतदाता के पास टेंडर वोट का विकल्प होता है।

क्या होता है टेंंडर वोट
किसी अन्य के द्वारा किए गए फर्जी मतदान के बाद असली मतदाता की ओर से डाले जाते हैं। जब किसी मतदान केंद्र पर कोई फर्जी मतदाता वोट डाल जाता है और उसके बाद कोई मतदाता आकर यह दावा करता है कि असली वोटर तो वह है, तो पीठासीन पदाधिकारी ईवीएम से वोट नहीं करने देकर असली मतदाता को बैलेट पेपर देता है। उसमें उम्मीदवार के नाम के सामने मतदाता टिक मार्क लगा देता है। फिर उसे मतदाता के ही स्टेपल कर इसके लिए रखे गए लिफाफे में डाल देता है, यानि उससे टेंडर वोट तो डलवा लिया जाता है, लेकिन उस वोट की गिनती अन्य मतों के साथ नहीं होती। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद कोई उम्मीदवार अदालत में चुनाव याचिका दायर करे, तभी इन टेंडर वोट को गिना जाता है। गौरतलब है की सुप्रीम कोर्ट में सर्वप्रथम विलफ्रेड डिसूजा के मामले में वर्ष 1977 में डाले गए सभी टेंडर वोटों की गिनती की बात कही गई थी। 2008 के विधानसभा चुनाव में नाथद्वारा सीट पर एक वोट से हारने वाले कांग्रेस उम्मीदवार सीपी जोशी ने भी अपनी याचिका में कुछ टेंडर वोटों की गिनती करने की मांग की थी।