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ऑर्गन ट्रांसप्लांट की लंबी वेटिंग, ब्रेन डेड के नहीं हो पा रहे अंगदान

मेडिकल कॉलेजों में नहीं ऑर्गन डोनेशन रिट्रीवल सेंटर, मुश्किल में मरीज राज्य में मात्र दो सरकारी केन्द्रों में प्रत्यारोपण की सुविधा

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जयपुर

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Vikas Jain

Feb 26, 2024

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प्रदेश में किडनी, लिवर और हॉर्ट जैसे अंगों की जरूरत वाले गंभीर मरीजों की जान बचाने में अंगदान की कमी बड़ी बाधा है। अंगदान और प्रत्यारोपण की जरूरत के बावजूद सरकारी क्षेत्र में प्रदेश के सवाईमानसिंह अस्पताल और जोधपुर एम्स में ही अंग प्रत्यारोपण की सुविधा है। राज्य सरकार की तैयारी प्रदेश के 33 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की है। जिनमें से 20 अभी संचालित हैं। लेकिन यहां भी अंग प्रत्यारोपण तो दूर ऑर्गन डोनेशन रिट्रीवल सेंटर (ब्रेन डेड मरीज के अंग निकालने के केन्द्र) की भी सुविधा तक नहीं है।

इसके चलते जिलों में ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों की काउंसलिंग कर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित तक करना मुश्किल हो रहा है।

मरीजों की लंबी वेटिंग लिस्ट

स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो राजस्थान) के अनुसार प्रदेश में किडनी ट्रांसप्लांट के 608 सहित लिवर और हॉर्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले 230 और 85 मरीज वेटिंग लिस्ट में है। यह सूची बड़ी होने के मुख्य कारणों में अंगदान की कमी होना और जिलों में ब्रेन डेड के अंग निकालने की सुविधा नहीं होना है।


राज्य में अंग प्रत्यारोपण केन्द्र


किडनी ट्रांसप्लांट
अधिकृत अस्पताल : 04

सरकारी : 02, एसएमएस जयपुर और जोधपुर एम्स
निजी : 12

लिवर ट्रांसप्लांट : 04

एसएमस जयपुर और जोधपुर एम्स : 02
निजी : 02

हॉर्ट ट्रांसप्लांट : 05

एसएमएस जयपुर : 01
निजी : 04

लंग्स ट्रांसप्लांट : 02

एसएमएस जयपुर : 01
निजी : 01

अब तक कैडेवर ट्रांसप्लांट

किडनी : 75
लिवर : 24

हॉर्ट : 09
लंग्स : 01

पैंक्रियाज : 01


प्रति वर्ष अंग प्रत्यारोपण की जरूरत (देश में)
किडनी : 2.5 लाख

लिवर : 50 हजार
हॉर्ट : 50 हजार

कॉर्निया : एक लाख


अंगदान में बड़ा बदलाव ला सकता है यह कदम

अंग प्रत्यारोपण के लिए वेटिंग लिस्ट चिंताजनक है। इसे खत्म करने या कम करने के लिए जिलों में भी ऑर्गन डोनेशन रिट्रीवल सेंटर बनाए जाने चाहिए। जहां सिर्फ ब्रेन डेड के परिजनों की काउंसलिंग कर अंग निकालने की सुविधा हो। बड़े मेडिकल कॉलेजों की टीम वहां जाकर यह कार्य कर सकती है। इसके बाद अंगों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाया जा सकता है। यह कदम अंगदान की जरूरत वाले मरीजों की जान बचाने में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

- डॉ.धनंजय अग्रवाल, किडनी रोग निदान विशेषज्ञ, सवाईमानसिंह अस्पताल जयपुर