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लोटस डेयरी का फोकस सार्वजनिक स्वास्थ्य पर, फोर्टिफाइड दूध उपलब्ध कराया

लोटस डेयरी ने कीमतों में कोई बदलाव किए बिना अपने दूध को विटामिन ए और डी के साथ फोर्टिफाइड करने की घोषणा की है। विटामिन ए और डी की कमी के परिणामस्वरूप सभी आयु और सामाजिक आर्थिक समूहों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर होता है और यह समस्या आम है। दरअसल, फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में खाद्य उत्पादों में सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे विटामिन ए और विटामिन डी की मात्रा बढ़ाई जाती है, ताकि पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके।

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लोटस डेयरी का फोकस सार्वजनिक स्वास्थ्य पर, फोर्टिफाइड दूध उपलब्ध कराया

लोटस डेयरी के निदेशक अनुज मोदी के अनुसार, 'सूक्ष्म पोषक तत्वों के कारण होने वाले कुपोषण की समस्या आज दुनिया भर में मौजूद है और दुनियाभर में लगभग 200 करोड़ से अधिक लोग सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें से करीब-करीब आधे लोग हमारे देश में निवास करते हैं। खराब आहार, स्वास्थ्यप्रद भोजन तक लोगों की पहुंच नहीं होना और बदलते शहरी आहार मुख्य रूप से ऐसी कमियों के लिए जिम्मेदार हैं। सामाजिक रूप से जिम्मेदार कारोबार के रूप में हमें यह जानकारी देते हुए खुशी का अनुभव हो रहा है कि लोटस डेयरी ने अब इस समस्या को कम करने में मदद करने के लिए अपने दूध की फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लोटस डेयरी अपने उपभोक्ताओं के उस विश्वास का सम्मान करती है, जो उन्होंने हमारे प्रोडक्ट्स को अपनाते हुए हममें व्यक्तकिया है। इसलिए लोटस डेयरी अपने उपभोक्ताओं को सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और हम उस विश्वास को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत जारी रखने का वादा करते हैं।Ó
आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रो-प्रेसीडेंट और डीन ट्रेनिंग तथा हैल्थ इकोनॉमिस्ट और पब्लिक हैल्थ एक्सपर्ट डॉ पी आर सोडानी के अनुसार, 'आईआईएचएमआर तीन राज्यों - राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मिल्क फोर्टिफिकेशन को बढ़ावा देने और दूध को और बेहतर बनाने से संबंधित एक प्रोजेक्ट को लागू कर रहा है। इस परियोजना को ग्लोबल अलायंस फॉर इम्प्रूव्ड न्यूट्रिशन (जीएआईएन) के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत हम बेहतर और स्वास्थ्यप्रद परिणामों के लिए फोर्टिफाइड दूध के उत्पादन में सहायता के लिए दुग्ध उद्योग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य राजस्थान में फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया के माध्यम से दूध में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करना है। एफएसएसएआई मानकों के अधिसूचित गजट के अनुसार इस परियोजना ने राज्य के दुग्ध उद्योग को समर्थन प्रदान किया है। हमारे समर्थन से, लोटस डायरी ने दूध को फोर्टिफाइड करने की पहल की है। लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए हम लोटस डायरी की इस पहल की सराहना करते हैं।Ó लोटस की दूध प्रसंस्करण क्षमता प्रतिदिन 1.7 मिलियन लीटर की है और इसका वार्षिक बिक्री कारोबार 900 करोड़ रुपए से ऊपर है। लोटस डेयरी लगभग 1650 ग्राम-स्तरीय खरीद समितियों के माध्यम से 45,000 से अधिक डेयरी किसानों से दूध की खरीद करता है।