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भगवान राम को भेंट करने के लिए नहीं थे पैसे, मिट्टी से 71 हजार दीपक बनाकर कर दिए भेंट

अयोध्या में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सभी लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। किसी ने भगवान श्री राम को 108 फीट लंबी अगरबत्ती भेंट की तो किसी ने 2100 किलो का घंटा भेंट किया। लेकिन जयपुर के गजसिंहपुरा में रहने वाले मोहन प्रजापत ने भगवान श्री राम को अपने हाथों से बनाए हुए 71 हजार दीपक भेंट किए हैं।

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भेंट के लिए दीयें तैयार करते कुम्हार मोहन प्रजापत

जयपुर । अयोध्या में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सभी लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। किसी ने भगवान श्री राम को 108 फीट लंबी अगरबत्ती भेंट की तो किसी ने 2100 किलो का घंटा भेंट किया। लेकिन जयपुर के गजसिंहपुरा में रहने वाले मोहन प्रजापत ने भगवान श्री राम को अपने हाथों से बनाए हुए 71 हजार दीपक भेंट किए हैं। मोहन प्रजापत ने लगभग 1 महीने पहले ही दीपक बनाना शुरू कर दिया था। रात दिन की कड़ी मेहनत के बाद इन दीपकों को तैयार किया गया है। अब जयपुर की मिट्टी से बनाएं हुए दीपक अब आयोध्या नगरी को जगमगाने के लिए तैयार हैं।

भेंट करने के लिए नहीं थे पैसे, दीयें भेंट करने का लिया निर्णय-
मोहन प्रजापत बताते हैं कि मैं एक कुम्हार हूं, मेरे पास इतने पैसे नहीं कि मैं भगवान श्री राम को कोई बड़ी चीज भेंट कर सकूं। लेकिन मेरे पास एक ही चीज थी वह थी मिट्टी, जिससे मैंने दीपक बनाने का निर्णय लिया। एक महीने की कड़ी मेहनत और परिवार जनों के सहयोग से मैंने 71000 दीयें बना दिए। अब अयोध्या नगरी प्राण प्रतिष्ठा के दिन भेंट किए हुए दियों से जगमगाने के लिए तैयार है।

सर्दियों के सीजन में दीयें सेंकने में आती है परेशानी-
सर्दियों के सीजन में मौसम ठंडा रहता है इस वजह से दीपक सही तरह से तैयार नहीं हो पाते हैं। लेकिन भगवान श्री राम के आशीर्वाद से दीपक सेंकने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं देखने को मिली। दीपक बनाने का जितना लक्ष्य हम लेकर चल रहे थे उससे अधिक दीयें ही हमनें बनाए हैं।

चार पीढ़ियों से दीपक बनाने का कर रहे है कार्य-
मोहन प्रजापत बताते है कि उनका परिवार 4 पीढ़ियों से लगातार दीपक बनाने का कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी चौथी पिढ़ी चल रही हैं। चारों पीढ़ियों से ही वह लगातार मिट्टी से दीपक वह अन्य जरूरी सामान बना रहे हैं। लेकिन एक महिनें में 71 हजार दीपक बनाना उनके लिए नया अनुभव था। क्यूंकी इतने कम समय में हजारों संख्या में दीपक बनाना एक बड़ी चुनौती थी।