
इमरान शेख़
माह-ए-रमजान मुबारक के दसवें रोजे पर खुशख़बर यह है कि शहर की जौहरी बाजार स्थित जामा मस्जिद हेरिटेज लुक से निखर उठी है। नमाजियों और रोजेदारों में इस बात को लेकर खुशी है कि पिछले डेढ़ साल से स्मार्ट सिटी मिशन के तहत जारी रिनोवेशन के कार्य ने रफ़्तार पकड़ ली है। ऐसे में मस्जिद के बाहरी लुक को पूरी तरह से हेरिटेज में बदला गया है। अब लोहे की जाली की बजाय पत्थर की नक्काशी वाली जाली लगाकर मस्जिद के बरामदे वाले हिस्से के ऊपर हेरिटेज लुक दिया गया है। जो देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को भी देखने में आकर्षित कर रही है।
नमाजियों को मिलेगी सहूलियत
स्मार्ट सिटी बजट से अभी तक मस्जिद की चौथी मंजिल पर एक शानदार हॉल और बेसमेंट में फ्लोरिंग का कार्य पूरा किया जा रहा है। साथ ही आकर्षक और व्यवस्थित वजूखाने के अलावा वॉशरूम की संख्या भी बढ़ाई गई है। इसके अलावा सीढ़ियों को आरामदायक शेप दिया गया है और उनमें ग्रेनाइट पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। अब बुजुर्ग नमाजियों को भी सीढ़ी चढ़ने में सहूलियत मिलेगी।
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सौर ऊर्जा से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मस्जिद कमेटी के मुताबिक, पिछले कई सालों से एयर कंडीशनर लगने के बाद बिजली का बिल ज़्यादा आ रहा था। ऐसे में इस खर्च को कम करने के मकसद से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर पैसों की बचत की जा रही है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। कमेटी के मेंबर्स का कहना है कि इसका मकसद नमाजियों के बीच पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाना है ताकि वे बिजली जैसे प्रदूषणकारी स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम कर सकें।
इनका कहना है...
शब्बीर कुरैशी मोहम्मदी
सदर, जयपुर जामा मस्जिद कमेटी
जामा मस्जिद में पिछले डेढ़ साल से स्मार्ट सिटी बजट के तहत रिनोवेशन का काम किया जा रहा है। रिनोवेशन कार्य के तहत एक बड़ा हॉल, सौर ऊर्जा प्लांट और वजूखाने का काम किया गया है। आने वाले समय में नमाजियों और रोजेदारों को काफी सहूलियत मिलेगी।
गंगा-जमुनी तहज़ीब की गवाह जामा मस्जिद
रमजान मुबारक के महीने में जुमे की नमाज़ के दौरान मस्जिद के बाहर गंगा-जमुनी तहज़ीब का संगम देखने को मिलता है। जब जौहरी बाजार के कारोबारी नमाजियों को वजू करने के लिए पानी और बिछाने के लिए चादर मुहैया कराते हैं। रमजान माह में जामा मस्जिद में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ती है। पूरे राजस्थान में ऐसी कोई दूसरी मस्जिद नहीं है जहां एक साथ अलविदा जुमे पर इतने नमाज़ी नमाज़ अदा करते हो।
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1860 के करीब बनी थी जामा मस्जिद
जानकार बताते हैं कि 1860 के करीब जामा मस्जिद वजूद में आई थी। उस समय सौदागर शम्सी खानदान की एक महिला रोशन बेग़म ने 22 हज़ार रुपए मस्जिद के लिए दान में दिए थे। उन पैसों से जौहरी बाजार की दुकानों के ऊपर की जगह खरीद कर मस्जिद तामीर की गई थी। उस दौरान न तो बरामदे थे और न हो जौहरी बाजार से ऊपर जाने का रास्ता बना हुआ था। तब लोग जुमे की नमाज़ में लकड़ी के फट्टे लगाकर ऊपर चढ़ा करते थे।
Updated on:
21 Mar 2024 11:28 am
Published on:
21 Mar 2024 11:21 am

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