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Salute : बेटे की शादी के लिए बहू देख रही थी मां…. इधर बेटे की शहादत की सूचना मिली तो जड़ हो गई मां

जयपुर के सोड़ाला में नंदपुरी क्षेत्र मंे संक्लप को उनके घर से अंतिम विदाई देने की तैयारी चल रही है। दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी, सेना से जुडे अफसर जुटने लगे हैं।

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जयपुर
अभी कुछ दिन पहले तो उसे हसंते हुए ख्ुाशी से विदा किया था हमने.... उसे छेड़ते थे कि अब तो उम्र हो गई है शादी की.... तुम्हारी भी शहनाई बजने का समय आ चुका है। उनकी मां और पिता भी तैयारी कर रहे थे कि अब घर में दूसरी बहू आ जाए और परिवार पूरा हो जाए...। हम उसकी शादी की तैयारियां कर रहे थे.... कई लड़कियों की फोटोज उन्हें दिखा रहे थे.... ये लगभग यत भी कर लिया था कि इस साल उनकी भी शहनाई बजवानी ही है.... लेकिन हमें क्या पता था कि संक्लप अपने परिवार से किया संक्लप अपने देश की सेवा के लिए तोड़ देगा......। परिवार सदमे में है.... खास तौर पर माता पिता.... उनको यकीन नहीं है कि अभी एक महीने पहले बेटे को विदा किया था अब वह बिना सूचना ही वापस लौट रहा है तिरंगा ओढ़कर....। इतना कहने के बाद मामा की आखें भी नम हो गई और वे कुछ नहीं बोल सके....। जयपुर के सोड़ाला में नंदपुरी क्षेत्र मंे संक्लप को उनके घर से अंतिम विदाई देने की तैयारी चल रही है। दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी, सेना से जुडे अफसर जुटने लगे हैं।


मां स्कूल टीचर. पिता बैंक से रिटायर... भाई जॉब में
मेजर संक्लप यादव के परिजनों के बारे में बताया गया कि उनकी माता स्कूटी टीचर हैं और पिता कुछ समय पहले ही आरबीआई से रिटायर हुए हैं। बड़े भाई प्राईवेट जॉब में हैं। पड़ोसियों ने बताया कि जब भी संक्लप छुट्टी पर आते तो घर का माहौल ऐसा हो जाता था जैसे किसी त्यौंहार पर खुशी का माहौल हो, लेकिन आज सवेरे जब संक्लप के हमेशा के लिए चले जाने की सूचना मिली तो पूरी कॉलोनी मंे दुखी है लेकिन संक्ल्प के शौर्य पर सबको गर्व है।

हमारे खानदान से पहला आर्मी मैन... शौर्य पर फक्र हैं हमें...
संक्ल्प के मामा ने बताया कि हमारे परिवार और खानदान एवं उनके पिता के परिवार और खानदान से संक्लप पहला लड़का है जो आर्मी मैन बना है। हमे फक्र है उस पर....। स्कूल के बाद से ही उसने तय कर लिया था कि वह सेना में जाएगा और उसने जो संक्ल्प लिया वह पूरा भी किया। दुखी इसी बात का है कि वह अपने सफर को जल्द पूरा कर हम सबसे दूर चला गया।

पहले एयरपोर्ट पर सम्मान और फिर से होगें रूखसत
परिवार के सदस्यों ने बताया कि पार्थिव देह को पहले जयपुर एयरपोर्ट पर लाया जाएगा। वहां ससम्मान उनकी अगुवाई होगी और उसके बाद उनकी देह को उनके घर लाया जाएगा। यहां से ससम्मान संक्लप को विदा करेंगे। लेकिन वे जहन में हमेशा जीवित रहेंगे।

कुछ दिन में ही बड़ी ट्रेनिंग पर जाने वाले थे संक्लप
मेजर संक्लप के परिजनों ने बताया कि वे जब जयपुर आए थे तो बताया था कि कुछ समय के बाद बड़ी ट्रेनिंग पर जाने वाले हैं। खुश थे कि अब और बड़ा एयरक्रफ्ट उड़ाने का मौका मिलेगा। संभवतः होली के बाद ही वे ट्रेनिंग पर जाने वाले थे। लेकिन इस बीच हादसे से सब कुछ खत्म कर दिया।

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