
जयपुर . स्वस्थ नौजवानों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा विकसित दवा के अनैतिक प्रयोग (ड्रग ट्रायल) के आरोपों से घिरे मालपाणी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में अब जांच का 'ट्रायल' शुरू हो गया है। शनिवार को राज्य के जन स्वास्थ विभाग के 4 अफसरों ने पड़ताल की, रविवार को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की टीम दिल्ली से यहां पहुंची। जांच के दौरान ट्रायल की अनुमति देने वाली एथिक्स कमेटी पर भी सवाल खड़े हुए हैं। साथ ही इस अस्पताल में अब तक हुए सभी ड्रग ट्रायल की जांच की मांग उठी है।
दिल्ली से टीम सुबह अस्पताल पहुंची, संचालक से पूछताछ की। टीम के सहयोग के लिए एसएमएस अस्पताल से आए विशेषज्ञ डॉ. आरसी मीना ने कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले ही अस्पताल को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने कहा, केवल 3 लोगों का ट्रायल किया जा रहा है, जो अभी जारी है। कोई गलत प्रक्रिया या गलत माध्यम नहीं अपनाया गया। हालांकि दिल्ली से आए एक अधिकारी ने कहा, जांच अभी चल रही है, कोई क्लीन चिट नहीं दी गई है। उधर, शुक्रवार को जांच करने पहुंची राज्य सरकार की टीम में शामिल हॉस्पिटल प्रशासन के अति. निदेशक डॉ. रविप्रकाश ने बताया, इस अस्पताल में पहले भी दर्द की एक दवा पर ट्रायल हो चुका है। उस शोध के बाद से इस सेंटर के प्रति लोगों में संदेश है कि यहां पैसे मिलते हैं। अब यह जांच का विषय है कि क्या लोगों को पैसे देकर लाया जा रहा है?
उलटे बोल ब्लैकमेल कर रहे थे
डॉ. आरसी मीना ने तो मीडिया के समक्ष पीडि़तों पर ही आरोप जड़ दिए। बोले, ग्रामीणों को पता चला कि 20 तारीख को तीसरा डोज जाएगा तो 10-20 लोग गांव से उठकर चले आए। शाम को कहां जाएं, इसलिए वे वहीं सो गए। सुबह उठकर किराया मांगा और ब्लैकमेल करने लगे।
अस्पताल में 9 साल से चल रहा था ट्रायल
अस्पताल में 9 साल से ट्रॉयल का काम चल रहा है। बेसमेंट में पूरी विंग काम कर रही है। संबंधित कार्य डॉ. राहुल सैनी देख रहे हैं। यहीं मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है, ब्लड सैंपल आदि लिए जाते हैं।
एथिक्स कमेटी में नजदीकी लोग!
त्रिका की पड़ताल में पता चला कि डॉ. पुनीत सिंहल कमेटी के चेयरमैन, डॉ. अंशुल मालपाणी सचिव हैं। अस्पताल के निदेशक डॉ. एनके मालपाणी, डॉ. शालिनी गुप्ता, डॉ. सुनील शर्मा सहित चौमंू से एक ग्राम पंचायत जन प्रतिनिधि सोहनलाल सैनी भी समिति में शामिल हैं।
व्यावसायिक प्रतिस्पद्र्धा का लग रहा मामला
- अस्पताल से जुड़े कितने लोग एथिक्स कमेटी में हैं और क्यों?
सिंहल : दो लोग हैं, जो नियमानुसार हैं।
- इस मामले में आपकी कमेटी क्या कर रही है?
सिंहल : मामला व्यावसायिक प्रतिस्पद्र्धा का लग रहा है।
- मरीज यहां लाए गए, उन्हें दवा दी गई?
सिंहल : ऐसा हो ही नहीं सकता।
- मरीजों को गांव से स्क्रीनिंग कर लाने का काम डॉक्टर के बजाय दूसरे ही लोग कर रहे हैं?
सिंहल : कई तरह की बातें हैं, सरकारी जांच चल ही रही है।
एक्सपर्ट कमेंट
डॉ. नरेन्द्र खिप्पल, यूएस एफडीए अप्रूव्ड प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर ने कहा की किसी भी ट्रॉयल की पूरी जिम्मेदारी प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर की होती है। कोई भी कंपनी एथिक्स कमेटी की मंजूरी के बिना दवा भेजती ही नहीं है। कंपनी दवा भेजने से पहले एथिकल कमेटी का अप्रूवल पत्र लेती है। एथिक्स कमेटी सीडीएससीओ में पंजीकृत होती है।
Published on:
23 Apr 2018 12:14 pm
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