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मैंग्रोव : समुद्री किनारों के रक्षक संकट में

दुनियाभर के 75 फीसदी मैंग्रोव संकट में हैं। यह स्थिति पहले से ही जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे विश्व के लिए एक बड़ा खतरा है। मैंग्रोव दुनियाभर के सभी उष्णकटिबंधीय वनों के एक प्रतिशत से भी कम हैं, पर समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में बड़ी भूमिका निभाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार एक हेक्टेयर मैंग्रोव वन 3,754 टन कार्बन सोख सकते हैं। मैंग्रोव ऐसे पौधे होते हैं, जो उष्णकटिबंधीय तट रेखाओं और खारे पानी में उगते हैं। ये तूफान, सुनामी, बढ़ते समुद्र के स्तर और कटाव के विरुद्ध प्राकृतिक तटीय रक्षक के रूप में कार्य करते हैं।

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दुनियाभर के 75 फीसदी मैंग्रोव संकट में हैं। यह स्थिति पहले से ही जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे विश्व के लिए एक बड़ा खतरा है। मैंग्रोव दुनियाभर के सभी उष्णकटिबंधीय वनों के एक प्रतिशत से भी कम हैं, पर समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में बड़ी भूमिका निभाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार एक हेक्टेयर मैंग्रोव वन 3,754 टन कार्बन सोख सकते हैं। मैंग्रोव ऐसे पौधे होते हैं, जो उष्णकटिबंधीय तट रेखाओं और खारे पानी में उगते हैं। ये तूफान, सुनामी, बढ़ते समुद्र के स्तर और कटाव के विरुद्ध प्राकृतिक तटीय रक्षक के रूप में कार्य करते हैं।

नष्ट हुए तो बढ़ेगा बाढ़ का खतरा: दुनिया के 10 देशों भारत, मैक्सिको, इंडोनेशिया, ब्राजील, म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, मोजाम्बिक, मलेशिया और बांग्लादेश में वर्ष 1996 से वर्ष 2016 के बीच मैंग्रोव वन बढ़े हैं। लेकिन वैश्विक आंकड़ों पर विशेषज्ञों ने चेताया है कि मैंग्रोव नष्ट हुए तो बड़ी मात्रा में कार्बनडाइ ऑक्साइड पर्यावरण में जाएगी। साथ ही बाढ़ से होने वाले नुकसान में पांच लाख 17 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि होगी, प्रतिवर्ष डेढ़ करोड़ से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित होंगे।

मैंग्रोव से मिलती बाढ़ सुरक्षा

68,500 करोड़ से अधिक की संपत्ति को चीन में नष्ट होने से बचाते हैं।

21% राष्ट्रीय जीडीपी के बराबर होता है, सूरीनाम में हर साल बाढ़ से सुरक्षित संपत्ति का मूल्य।

(वैश्विक मैंग्रोव स्थिति रिपोर्ट, 2021 के अनुसार)

तेजी से हो रहे गायब मैंग्रोव

वर्ष 2016 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में मैंग्रोव कवर 1,35,881 वर्ग किमी है। कुल वन नुकसान की तुलना में मैंग्रोव तीन से पांच गुना तेजी से गायब हो रहे हैं। यूनेस्को के अनुसार तटीय विकास के कारण वर्ष 1980-2005 के बीच कई देशों ने अपने मैंग्रोव का 40% खो दिया है।

शुरू होगी नई परियोजना

यूनेस्को की महानिदेशक ऑद्रे अजोले के अनुसार अगले माह सात लैटिन अमरीकी देश कोलंबिया, क्यूबा, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, मैक्सिको, पनामा और पेरू में मैंग्रोव बहाली प्रोजेक्ट शुरू होगा। यह स्थानीय समुदायों को आर्थिक अवसर देगा। स्वदेशी आबादी और वैज्ञानिक समुदाय के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान भी होगा।

भारत में स्थिति: मैंग्रोव कवर 4992 वर्ग किमी है,। 2019 की तुलना में मैंग्रोव के 17 वर्ग किमी क्षेत्र में वृद्धि हुई है। यह विस्तार ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा और आंध्र प्रदेश में हुआ है।
‘कार्बन’ सोखने में इनकी बड़ी भूमिका

3900 वर्ग किमी से अधिक का क्षेत्र प्रतिवर्ष क्यूबा में।

70 लाख लोग वियतनाम और 30 लाख निवासी भारत में।

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