
mental health
विकास जैन
जयपुर। जरा सी बात पर आपा खोना, अत्यधिक क्रोधित हो जाना और उसके बाद अनियंत्रित होकर दूसरे और खुद का नुकसान कर बैठना। हाल ही के दिनों में अकेले राजधानी जयपुर में ही इस तरह के करीब आधा दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें आक्रोशित होने के बाद खतरनाक अपराध को भी अंजाम दे दिया गया। मनोरोग विशेषज्ञो के ओपीडी में आने वाले हर 10 में से एक मरीज इस तरह की परेशानी लेकर आ रहा है। जिसका मुख्य कारण भागदौड भरी जिंदगी, लाइफस्टाइल और जीवन पर हावी महत्वाकांक्षाएं हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लोगों में निराशा के कारण सहन करने की क्षमता कम होती जा रही है। इसका बड़ा कारण नशे की प्रवृत्ति अधिक होना भी है। - व्यक्ति के बात-बात में क्रोधित होने के पीछे उसके व्यक्तित्व का भी बड़ा हाथ होता है। कई लोग क्षणिक प्रतिक्रिया देने वाले होते हैं।
परामर्श के बिना बढ़ता रहता है विकार
इस तरह के लोगो में क्रोध अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार क्रोध किसी बीमारी का नाम नहीं, लेकिन यह मनोविकार का ऐ लक्षण जरूर है। इस तरह के सभी लोग चिकित्सकीय परामर्श के लिए नहीं पहुंचते। इससे उन्हें ना तो उनकी समस्या का पता चलता और ना ही वे इसका समाधान ढूंढ पाते। अत्यधिक चिंता में भी व्यक्ति का स्वभाव क्रोध वाला हो सकता है।
इस तरह के मामले आए सामने
17 दिसंबर 2022 : धार्मिक कार्यक्रम में जाने से रोका तो इंजीनियर ने ताई की हथोड़े से की ताबड़तोड वार कर हत्या, शव के किए कई टूकड़े, जयपुर के विद्याधर नगर का मामला
7 अक्टूबर 2022 : थप्पड़ के बदले मौत, घर में घुसकर हमला, ईंट से युवक का सिर कुचला, तेज बाइक चलाने की बात को लेकर हुई थी कहासुनी
25 जून 2022 : काम को लेकर विवाद, साथी मजदूर के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर हत्या, चाय बनाने और बर्तन धोने की बात को लेकर हुआ था विवाद
20 मई 2022 : कतार में लगने को कहा तो पीट-पीटकर की हत्या, मानसरोव क्षेत्र में पेट्रोप पंप पर वारदात - कतार में लगने की बात पर हुए जरा से विवाद में ही 55 वर्ष के बुजुर्ग की हत्या कर दी गई
21 जनवरी 2021 : सब्जी मंडी में लाइट बंद करने के मामूली विवाद में बुझा घर का चिराग, मानसरोवर वीटी रोड पर दो गुटों में चाकुबाजी
इनमें अधिक आशंका
- ऐसे असामाजिक लोग जिनके साथ बचने में कोई घटना हुई हो
- घर का खराब माहौल, उपेक्षित बच्चा या परिवार की भी इसमें मुख्य भूमिका हे
- कामकाज में असुरक्षा या असहजता
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- क्रोध भरे व्यवहार पर नजर रखें
- अपनी भावनाओं को परिजनों एवम मित्रों से साझा करें
- दिनचर्या सुव्यवस्थित रखें
- कुछ होबिज़, मनोरंजन, योग और मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें
- नशे से दूर रहें और जरूरत होने पर मनोवैज्ञानिक सलाह लें
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अमूमन हमारा गुस्सा हमारी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। स्वयं को असुरक्षित-असहाय महसूस करना या अपने प्रति किसी के व्यवहार को नकारात्मक रूप में लेना। व्यक्ति के बचपन के अनुभव, उसके साथ हुआ व्यवहार, पारिवारिक अस्थिरता, सकारात्मक संवाद की कमी, नशे का प्रचलन इत्यादि भी कहीं ना कहीं छोटी छोटी बातों में गुस्से और चिड़चिड़ेपन का कारण बन सकते हैं। इस तरह का व्यवहार किसी मानसिक रोग का लक्षण भी हो सकता है या व्यक्तित्व की समस्या भी।
डॉ.अखिलेश जैन, विभागाध्यक्ष, मनोरोग, ईएसआई
Published on:
22 Dec 2022 04:44 pm
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