जयपुर। चांदपोल गेट के पास जिस जगह पर
मेट्रो की टनल बोरिंग मशीन खुदाई कर रही है, सोमवार दोपहर ठीक उसके ऊपर धरती फटने
लग गई। गेट के बाहर बने सुलभ शौचालय से गेट तक करीब 30 फीट लम्बी यह दरार जमीन में
चल रही टीबीएम के साथ-साथ चांदपोल गेट की तरफ बढ़ती हुई चौड़ी हो रही थी।
गुस्साए
लोगों ने रास्ता रोक कर चांदपोल के नीचे ही धरना देना शुरू कर दिया। पास ही स्थित
एक सीवर चैम्बर में भी दरारें देखी गइंü। गेट के पास परकोटे के नीचे भी कुछ हिस्से
में जमीन धंस गई है। इसके बावजूद मेट्रो प्रोजेक्ट डायरेक्टर अश्विनी सक्सेना का
दावा था कि यह कोई गंभीर बात नहीं है और हमारी मशीन चल रही है। जमीन करीब 8 इंच
गहराई तक और 4 से 9 मिलीमीटर तक फटी है।
आनन-फानन में पहुंचे अधिकारी
दोपहर करीब 3 बजे गेट के बाहर सड़क पर यह
दराई पड़ी। दरार चौड़ी होते देख मेट्रो कर्मी सकते में आ गए। जिस जगह दरार आई है,
उसी के नीचे टीबीएम के जरिए टनल की खुदाई की जा रही है। मेट्रो कर्मियों ने अपने
सुरक्षा उपकरणेां से जांच करनी शुरू कर दी। आनन-फानन में मेट्रो प्रोजेक्ट
डायरेक्टर अश्विनी सक्सेना, जीएम अखिलेश सक्सेना, विजय गुप्ता और दिल्ली मेट्रो के
प्रमुख अधिकारी संजीव मंलिक भी पहुंच गए।
धरोहर पर देर रात नहीं हो सकी
सुनवाई
चांदपोल दरवाजे को बचाने की गुहार पर सोमवार देर रात सुनवाई नहीं हो
सकी। विरासत संरक्षण के लिए संघष्ाüरत प्रतिनिधि देर रात हाईकोर्ट न्यायाधीश अजय
रस्तोगी के आवास पहुंचे, जहां उन्हें मंगलवार को न्यायालय समय में आने को कहा गया।
शहरवासी यदुनाथ दशानन व अन्य लोगों ने ने हाईकोर्ट में मामले में दखल देने की गुहार
लगाई है।
विरासत को नहीं पहुंचे नुकसान
मैंने सोमवार को मेट्रो
अधिकारियों से बात कर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि विरासत को नुकसान नहीं
पहुंचे। राजस्थान पत्रिका जिस गंभीरता से इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त कर रहा है,
उससे अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अशोक गहलोत, पूर्व
मुख्यमंत्री
झूठ की खुली कलई
संरक्षित चांदपोल गेट की सुरक्षा के माकूल
इंतजाम करने के तमाम दावों की पोल खुलना शुरू हो गई है। साथ ही मेट्रो अधिकारियों
के झूठ की कलई भी खुलने लगी है। मेट्रो प्रशासन जयपुर की जनता और अन्य प्रभावित
दूसरे विभागों को पेश तथ्यों से भ्रमित कर रहा है। मेट्रो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर
अश्विनी सक्सेना ने रविवार को दावा किया था कि टीबीएम से 5 मिलीमीटर तक ही मिट््टी
खिसकेगी, जबकि सोमवार को उन्होंने कहा कि टीबीएम के प्रेशर से जमीन एक से सवा इंच
तक ऊपर-नीचे हो सकती है। रविवार को उन्होंने कहा कि टीबीएम से अभी तक सर्वाधिक
0.682 मिमी प्रति सैकण्ड कम्पन आ रहा है। वहीं सोमवार को कहा कि कम्पन 1.880 आ रहा
है।
निगम नहीं, पुरातत्व विभाग का जिम्मा : महापौर
मेट्रो की खुदाई से
चांदपोल गेट को नुकसान पहुंचने की स्थिति को लेकर महापौर निर्मल नाहटा का कहना है
कि यह जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। उन्हें देखना चाहिए। वैसे नगर निगम प्रशासन
की ओर से भी सोमवार को पत्र लिखा गया है कि पूरी सावधानी बरती जाए। वैसे हाईकोर्ट
के आदेशों के बात है तो परकोटे के आसपास अवैध निर्माण नहीं होने देने की पालना करा
रहे हैं। मंगलवार को मौके का जायजा लेंगे और गेट की सुरक्षा को लेकर मेट्रो
अधिकारियों से वार्ता करेंगे।
सीएमडी ने बनाई दूरी
मेट्रो सीएमडी
निहालचंद गोयल ने चांदपोल गेट के पास चल रहे टनल निर्माण कार्य से दूरी बना रखी है।
उनका सोमवार शाम मेट्रो टनल का दौरा तय था, लेकिन जैसे ही दरार आने की सूचना मिली,
दौरा रद््द कर दिया गया। जब इस संबंध में उनसे फोन पर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने
जवाब दिया कि जयपुर मेट्रो ने संरक्षित गेट की सुरक्षा का हर संभव उपाय कर रखे हैं।
लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। गेट को कोई खतरा नहीं है। कम्पन पर गोयल का कहना है
कि टीबीएम से 0.1 मिलीमीटर प्रति सैकण्ड कम्पन हो रहा है। उन्होंने माना कि टीबीएम
के प्रेशर के कारण चांदपोल के बाहर जमीन ऊपर की ओर उठी है।
जयपुर मेट्रो लगातार
पुरातत्व नियमों की धçज्जयां उड़ा रहा है। बिना ऑर्कियोलॉजिकल और हैरिटेज इम्पेक्ट
असेसमेंट के चांदपोल गेट के नीचे टनल बनाई जा रही है। यदि सरकार ने इस समय सही कदम
नहीं उठाया तो शहर की विरासत नष्ट हो जाएगी। अर्चना शर्मा, उपाध्यक्ष,
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस
गेट को खतरा देख लगाया जाम
गेट के बाहर
बड़ी दरार की सूचना पर धरोहर बचाओ समिति के संरक्षक भारत शर्मा और उनके सहयोगी भी
मौके पर पहुंच गए। लोगों ने स्केल से दरार की गहराई और चौड़ाई भी नापी। बाद में
उन्होंने करीब 7 बजे अचानक नारेबाजी करते हुए चांदपोल पर रास्ता जाम कर गेट पर धरना
दिया। पुलिस अधिकारियों ने रास्ता खुलवाने की कोशिश की, लेकिन रास्ता नहीं खोला
गया। इस पर पुलिस ने मेट्रो अधिकारियों को वहां बुलाया। मेट्रो अधिकारियों ने भी
समझाइश करने की कोशिश की तो लोगों ने कहा कि जयपुर मेट्रो, पुरातत्व विभाग और निगम
ने संरक्षित चांदपोल गेट को फाइलों में फुटबॉल बना रखा है। अश्विनी सक्सेना ने गेट
में नुकसान की जिम्मेदारी जयपुर मेट्रो की बताई तब रात आठ बजे रास्ता खुला।