
अरावली विश्व की प्राचीनम पर्वतमाला है। मेवाड़ क्षेत्र में चट्टानें 150 से 330 करोड़ साल तक पुरानी हैं। इनके माध्यम से पृथ्वी की उत्पत्ति से जुडे़ रहस्यों को भली-भांंति समझकर सुलझाया जा सकता है। यहां मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में आए भू-वैज्ञानिकों ने जिले के सलंूबर, जयसमंद, देबारी की चट्टानों के फील्ड अध्ययन के बाद यह सार दिया। कार्यशाला में 55 भू-वैज्ञानिक शामिल हुए। उदयपुर शहर के चहुंओर की पहाडि़यां बहुत प्राचीन व विशिष्ट हैं। पर्वतमालाओं में जस्ता, सीसा, ग्रीन मार्बल आदि खनिज प्रचुर मात्रा में हैं। खनिज दोहन के लिए सुरक्षित नीतियां बनाई जानी चाहिए। भू-गर्भीय अध्ययन के लिए भी प्र्राचीन पर्वतमालाओं का संरक्षण बहुत आवश्यक है।
ग्रीन के साथ पिंक मार्बल भी खूब : एमएस बड़ोदरा विश्वविद्यालय के प्रो. केसी तिवारी ने कहा कि उदयपुर संभाग ग्रीन मार्बल के लिए जाना जाता है। सलंूबर क्षेत्र की पहाडि़यों में पिंक मार्बल भी प्रचुर मात्रा में है। इन पहाडि़यों में सीसा, जस्ता आदि खनिज भी अच्छी मात्रा में हैं। खजिन उपलब्धता में मेवाड़ काफी समृद्ध है।
लावा से बनी हैं चट्टानें : प्रो. तिवारी ने बताया कि करोंड़ों साल पूर्व इन चट्टानों का निर्माण भू-गर्भीय लावा से हुआ था। ग्रीन मार्बल की अधिकता वाली चट्टानें पूर्णत: लावा से बनी हैं। कालांतर में हुए परिर्वतनों से लावा ने ग्रीन मार्बल का रूप ले किया। प्रो. विनोद अग्रवाल ने बताया कि क्लास की अपेक्षा फील्ड अध्ययन से विद्यार्थी बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
Published on:
19 Nov 2015 11:08 am
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