
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत कार्यरत एक लाख 9 हजार कुक कम हेल्पर्स के लिए नया साल नई उम्मीद लेकर आया है। पिछले नौ माह से मानदेय के लिए तरस रही इन हेल्पर्स को शिक्षा विभाग जल्द ही उनके मानदेय का भुगतान करेगा। जिससे उन्हें आर्थिक तंगी से निजात मिल सकेगी। जानकारी के मुताबिक शिक्षा विभाग आगामी एक दो दिनों में इस संबंध में आदेश जारी कर देगा। प्रदेश के शिक्षा विभाग ने यह निर्णय केंद्र सरकार से इस संबंध में बात करने के बाद लिया है।
घर चलाना तक हुआ मुश्किल
गौरतलब है किलॉकडाउन के बाद से ही सरकार ने सरकारी स्कूलों को बच्चों के लिए बंद कर दिया और तब से स्कूल अभी तक बंद पड़े हैं इस दौरान बच्चों के लिए स्कूलों में पोषाहार नहीं पकाया गया जिससे इन कुक कम हेल्पर को मानदेय भी नहीं दिया गया था। जिससे इन हेल्पर्स के लिए आर्थिक तंगी के कारण चूल्हा जलाना तक मुश्किल हो गया था और यह हेल्पर्स काफी समय से मानदेय का भुगतान किए जाने की मांग कर रहे थे।
दी जाती है बेहद कम राशि
आपको यह बता दे कि सरकार की ओर से कुक कम हेल्पर को बेहद कम राशि मानदेय के रूप में दी जाती है। इतनी कम राशि में वैसे ही महिलाओं के लिए घर का खर्च चलाना भी बड़ा मुश्किल होता था लेकिन गत 9 मार्च 2020 के बाद से इन्हें मानदेय ही नहीं मिला था सरकारी स्कूल में पोषाहार पकाने वाली कुक कम हेल्पर महिलाओं को सरकार की ओर से मानदेय के रूप में 1320 रुपए प्रतिमाह दिया जाता है। गत 9 महीने से यह राशि नहीं दी गई थी। सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत 50 बच्चों पर एक और 100 बच्चों पर दो कुक कम हेल्पर महिलाओं को लगाया जाता है। आपको यह भी बता दें कि मिड डे मील योजना के तहत भोजन पकाने के लिए संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है ,बल्कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार स्कूलों में पोषाहार पकाए जाने के लिए वर्ष 2010 से कुक कम हेल्पर की सेवाएं मानदेय के आधार पर जा रहे हैं।
तीन बार बढ़ाई राशि, फिर भी है कम
केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार पोषाहार पकाने के लिए कुक कम हेल्पर को अप्रैल 2017 से पहले तक 1000 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा था। इसमें राज्य और केंद्र सरकार की ओर से क्रमश: 400 और 600 रुपए वहन किया जा रहा था। 1 अप्रैल 2017 से राज्य सरकार की ओर से अपने स्वयं के संसाधनों से इनके मानदेय में 200 रुपए की वृद्धि की गई और इनका मानदेय 1200 रुपए कर दिया गया यानी आधी राशि केंद्र और आधी राज्य सरकार वहन कर रही थी। इसके बाद एक बार फिर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से एक जुलाई 2018 से कुक कम हेल्पर के मानदेय में बढ़ोतरी कर इनका मानदेय 1320 रुपए प्रतिमाह कर दिया। आपको बता दें कि इस क्षेत्र में कार्य कर रहे अधिकांश महिलाएं गरीब परिवारों से हैं इनमें भी अधिकांश विधवा परित्यक्ता हैं।
इनका कहना है,
लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद होने के कारण मिड डे मील बनाने वाले हेल्पर्स को मानदेय नहीं दिया गया था। हमने इस संबंध में केंद्र सरकार से बात करने के बाद उन्हें कोराना काल का मानदेय दिए जाने का निर्णय लिया है।
गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्य मंत्री
Updated on:
01 Jan 2021 07:28 pm
Published on:
01 Jan 2021 11:22 am
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