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Bansi Paharpur Sandstone: 26 साल बाद गुलाबी, लाल पत्थर का खनन, मिलेगा राजस्व व रोजगार

पर्यावरण मंजूरी जारी होने के साथ ही करीब 26 साल बाद बंशीपहाड़पुर ( Bansi Paharpur Sandstone) के सेण्ड स्टोन के वैध खनन की राह प्रशस्त हो गई है। इसी माह क्षेत्र में 3 खानों में गुलाबी और लाल पत्थर का वैध खनन कार्य आरंभ हो गया है। जुलाई के पहले पखवाड़े तक बंशीपहाड़पुर की शेष 34 मंशापत्रधारकों द्वारा भी खनन आरंभ कर दिया जाएगा।

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Bansi Paharpur Sandstone: 26 साल बाद गुलाबी, लाल पत्थर का खनन, मिलेगा राजस्व व रोजगार

Bansi Paharpur Sandstone: 26 साल बाद गुलाबी, लाल पत्थर का खनन, मिलेगा राजस्व व रोजगार

Bansi Paharpur Sandstone: पर्यावरण मंजूरी जारी होने के साथ ही करीब 26 साल बाद बंशीपहाड़पुर के सेण्ड स्टोन के वैध खनन की राह प्रशस्त हो गई है। इसी माह क्षेत्र में 3 खानों में गुलाबी और लाल पत्थर का वैध खनन कार्य आरंभ हो गया है। जुलाई के पहले पखवाड़े तक बंशीपहाड़पुर की शेष 34 मंशापत्रधारकों द्वारा भी खनन आरंभ कर दिया जाएगा। राजस्थान में खनिज क्षेत्र में यह एक बड़ी उपलब्धि है। इससे अब सरकार को राजस्व, नया निवेश और रोजगार के अवसर बढेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम व पीएचईडी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि बंशीपहाड़पुर में वैध खनन कार्य आरंभ कराना सरकार के लिए चुनौती भरा काम था। उच्चतक न्यायालय के आदेश से दिसंबर 1996 से बिना डायवर्जन के गैर वानिकी कार्य प्रतिबंधित किए जाने से उक्त क्षेत्र में वैध खनन बंद हो गया था। देश दुनिया में बंशीपहाड़पुर के पत्थर की मांग को देखते हुए क्षेत्र में अवैध खनन होने और आए दिन कानून व्यवस्था बाधित हो रही थी। प्रभावी तरीके से राज्य का पक्ष रखने का परिणाम रहा कि पहले केन्द्र सरकार से वन भूमि का डायवर्जन और उसके बाद प्लॉटों को तैयार कर ऑक्शन की प्रक्रिया सफलता पूर्वक पूरी की गई।

मुख्यमंत्री के प्रयासों से मिली सफलता
एसीएस माइंस डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राममंदिर के लिए पत्थर से जुड़ा अतिसंवेदनशील मामला होने के कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस प्रकरण में गंभीर थे और उनके अथक प्रयासों से ही पहले अतिसंवेदनशील बंशी पहाड़पुर खनन क्षेत्र ब्लॉक ए व बी सुखासिला एवं कोट क्षेत्र को बंध बारेठा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से बाहर करवाया गया और उसके बाद केन्द्र सरकार के वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन भूमि के डायवर्जन की स्वीकृति जारी कराई गई। भारत सरकार की स्वीकृति के साथ ही राजस्थान के माइंस विभाग ने बंशी पहाड़पुर में खनन ब्लॉक तैयार कर इनके ऑक्शन की तैयारी आरंभ की गई और इसके लिए एसएमई जयपुर प्रताप मीणा को इस कार्य के समयवद्ध क्रियान्वयन के लिए प्रभारी अधिकारी बनाते हुए जिम्मदारी दी गई। माइंस एवं गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने इस कार्य को प्राथमिकता में रखते हुए बंशी पहाड़पुर क्षेत्र में खानों के प्लाट तैयार कर उनकी ई— नीलामी व वैद्य खनन के लिए किए जा रहे प्रयासों की निरंतर मोनेटरिंग करते रहे हैं। बंशी पहाड़पुर के पत्थर की राम मंदिर निर्माण में भी मांग को देखते हुए यह इस क्षेत्र में वैध माइंनिग शुरु करवाना राज्य सरकार के लिए संवेदनशील रहा है।

41 प्लॉट तैयार कर ई—पोर्टल के माध्यम से नीलामी
राज्य सरकार ने बंशीपहाड़पुर में 41 प्लॉट तैयार कर भारत सरकार के ई—पोर्टल के माध्यम से ई—नीलामी के बाद पहले कलस्टर क्लीयरेंस प्राप्त की गई। पिछले दिनों 41 मंशाधारकों में से 12 मंशंधारकों को एसईआईएए द्वारा पर्यावरणीय क्लीयरेंस जारी कर दी गई। अब 4 को छोड़कर सभी मंशधारकों को स्टेट एंवारयरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट कमेटी द्वारा एनवायरमेंट क्लीयरेंस जारी कर दी गई है। 4 मंशाधारकों ने अभी तक ईसी के लिए आवेदन नहीं किया है। 5 खनन पट्टाधारकों को जलवायु सहमति प्राप्त हो गई है और इनमें से 3 खानों में खनन कार्य आरंभ हो गया है। शेष खानों में भी जुलाई के दूसरे सप्ताह तक खनन आरंभ हो जाएगा। क्षेत्र में विश्वविख्यात गुलाबी लाल पत्थर का करीब 26 साल बाद वैध खनन आरंभ हो गया है। इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, वहीं नए निवेश की राह प्रशस्त होगी।