यूं तो जिले के विभिन्न विभागों में लम्बे समय से स्टाफ का टोटा गंभीर समस्या बना हुआ है लेकिन एक विभाग का तो कोई धणीधोरी ही नहीं है।
अल्पसंख्यक मामलात विभाग लम्बे समय से चपरासी के भरोसे संचालित है। इसके चलते जहां विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह है स्थिति
विभाग में वर्तमान में सारे पद खाली पड़े हुए हैं। यहां कुल 10 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से कोई भी पद भरा हुआ नहीं है। स्टाफ के नाम पर सिर्फ संविदा पर कार्यरत एक कम्प्यूटर ऑपरेटर व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही तैनात है।
जबकि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, प्रोग्राम अधिकारी, कनिष्ठ लेखाकार, वरिष्ठ लिपिक, कनिष्ठ लिपिक के 3 व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद रिक्त हैं।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का पद रिक्त होने से इसका कार्यभार सहायक निदेशक परीवीक्षा एवं समाज कल्याण अधिकारी को दे रखा है।
कई बार लिखे पत्र
विभाग में अधिकारी व कर्मचारी नहीं होने से कामकाज प्रभावित होने को लेकर जिला प्रशासन की ओर से कई बार निदेशालय को पत्र लिखे गए लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ, लेकिन किसी अधिकारी व कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई और स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ये कार्य हो रहे प्रभावित
अधिकारी व कर्मचारियों के नहीं होने से विभाग के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जिनका खामियाजा आमजन को उठाना पड़ रहा है।
विभाग में मुस्लिम वफ्फ बोर्ड, राजस्थान मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास सहकारी निगम,15 सूत्रीय कार्यक्रम, मौलाना आजाद फाउण्डेशन कार्य, अल्पसंख्यक वर्ग से संबंधित कल्याण कार्यक्रम, अल्पसंख्यक पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति उपविभाग और कार्यक्रम समाहित होते हैं। जिले में भी इनमें से कई कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं।
इनमें छात्रवृत्ति योजना, कारोबारी एवं शैक्षणिक ऋण योजना आदि कार्य ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इनके अलावा कार्यालय रिकॉर्ड संधारण आदि कार्यो ंमें भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कार्यालय में कोई अधिकारी व क्लर्क नहीं होने से लोगों को योजनाओं की जानकारी देने वाला भी कोईनहीं मिलता।
परेशानी तो है ही
विभाग में स्टाफ नहीं होने से कामकाज तो प्रभावित हो ही रहा है। इसके लिए निदेशालय को लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया है।
दिलीप रोकडिय़ा, कार्यवाहक जिला अल्पसंख्यक मामलात विभाग, प्रतापगढ़