
चीन का मोंक फ्रूट उगाने में कामयाब हुए भारतीय वैज्ञानिक
भारतीय वैज्ञानिकों को चीन का मोंक फल उगाने में बड़ी सफलता मिली है। हिमाचल के पालमपुर जिले में चीन के इस फल को उगाया गया है। मोंक फल को इसके पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है और इसमें कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है। इसके अलावा यह फल मधुमेह के रोगियों के लिए उपयोगी होता है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो-रिसोर्स टेक्नोलॉजी (आइएचबीटी) के वैज्ञानिकों और साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की एक काउंसिल, अब मोंक फल की बढिय़ा खेती और विविध सुधारों की दिशा में काम कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि भारतीय बाजार में डायबिटीज रोगियों और कम कैलोरी घटक की मांग करने वाले निर्माताओं के लिए मोंक फल जल्द ही बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। भारत में टाइप टू डायबिटीज से पीडि़त 6.24 करोड़ लोग मौजूद हैं, ऐसे में यह फल उनके लिए काफी उपयोगी होगा। फल को उगाने की सफलता के बाद अब वैज्ञानिक इस फल से एक्सट्रेक्ट निकालने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस फल से तैयार होने वाला रस मार्केट में जल्द ही उपलब्ध होगा। मोंक फ्रूट मूल रूप से चीन का फल है। सीएसआइआर ने इस प्रोजेक्ट पर काम एक साल पहले शुरू किया था। उचित कृषि तकनीक के अभाव और वैज्ञानिक ज्ञान की कमी के कारण इसकी खेती पड़ोसी देश में व्यावसायिक रूप से नहीं की जाती है। लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने पर्याप्त जलवायु स्थितियों और कृषि तकनीकों को सुनिश्चित करके सफलतापूर्वक इसे उगाया है। वर्तमान में प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होने वाले नॉन कैलोरी स्वीटनर की मांग काफी ज्यादा है व उसमें मोंक फल का योगदान काफी कम है और इसकी वजह से इस उपयोगी फल की पूर्ति सीमित है। वैज्ञानिक इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं क्योंकि देश में लगातार डायबिटीज यानी मधुमेह से पीडि़त लोगों की संख्या में वृद्धि होती जा रही है।
Published on:
01 Dec 2018 04:21 pm
