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chinease manjha:
चाइनीज मांझा मकर संक्राति त्योहार के उल्लास में उदासी का कारण बनता है, फिर भी हर साल इसका उपयोग बड़े स्तर पर होता है। इससे होने वाली घटनाओं के पीड़ित होते हैं राहगीर। खासकर बाइक या दोपहिया पर आने—जाने वालों की गर्दन के मांझे से कटने के मामले सर्वाधिक होते हैं। एसएमएस ट्रोमा सेंटर में ऐसे मामलों को तुरंत प्राथमिक उपचार देने के लिए इस बार भी विशेष टीम को तैनात किया गया है। ट्रोमा सेंटर में जनरल फिजिशियन, सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, आॅर्थो सर्जन जैसे विशेषज्ञों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। पिछले दो सालों की बात करें तो ट्रोमा सेंटर में 2020 में 150 घायल मरीज मकर संक्रांति के दिन आए थे। वहीं पिछले साल 160 मरीजों का उपचार यहां किया गया।
दो दिनों में चार मरीज
मकर संक्रांति से पहले भी ट्रोमा सेंटर में चाइनीज मांझे से घायल लोग पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को यहां 42 साल का व्यक्ति मांझे गर्दन में गंभीर चोट के साथ पहुंचा। उसकी गर्दन पर टांके लगाने पड़े। वहीं छह साल के एक बच्चे की गर्दन पर भी ट्रोमा सेंटर के विशेषज्ञों ने टांके लगाए। उपचार के बाद दोनों को घर भेज दिया गया। वहीं बुधवार को यहां पर एक 10 और एक 13 साल का बच्चा चाइनीज मांझे से हाथ कटने की समस्या के साथ पहुंचे। दोनों बच्चों के हाथों में टांके लगाने पड़े।
ऐसे आते हैं मामले
पतंगबाजी के दौरान छत से नीचे गिरने, मांझे से हाथ पैरों में चोटें आने, मांझे की चपेट में राहगीरों के आने से गर्दन या नाक पर गंभीर चीरा लगने जैसे मामले यहां आते हैं। वहीं पूरे दिन ठंडी हवा में छत पर रहने से सांस की बीमारी जैसी शिकायत लेकर भी मरीज अस्पताल आते हैं।
शाम को ना निकलें
एसएमएस में प्लास्टिक सर्जन आरके जैन का कहना है कि सर्वाधिक गर्दन में चोट के मामले शाम के समय आते हैं। हालांकि दिनभर चाइनीज मांझे से कटने के मरीज आते हैं। शाम के समय बाइक पर बाहर ना निकले। मकर संक्रांति के दिन जब भी बाहर जाएं गले में मफलर और सही हेलमेट का इस्तेमाल करें। मास्क भी इस तरह लगाएं कि मांझे से नाक पर चोट ना पहुंचे। वहीं लोगों को चाइनीज ही नहीं, किसी भी तरह के मांझे का उपयोग नहीं करना चाहिए।
Published on:
13 Jan 2022 05:54 pm
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