11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘खून का स्वाद’ भूल गए नींद की कमी से जूझ रहे मच्छर

सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का अनूठा अध्ययन मच्छरों को खून पीने से ज्यादा सोना पंसद, सोते समय भी दिखते हैं जागे मच्छरों जैसे
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Aryan Sharma

Jun 15, 2022

mosquitoes

mosquitoes

वाशिंगटन. इंसान ही नहीं, अब मच्छर भी नींद की कमी से जूझ रहे हैं। नींद नहीं आने के कारण खून चूसने वाले मच्छर (Mosquitoes) 'खून का स्वाद' भूल गए हैं। सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी (University of Cincinnati) में हाल ही में हुए एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। इस अध्ययन के मुताबिक नींद की कमी से कीड़े-मकौड़े भी बीमार हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में मच्छर जहां खून का स्वाद भूल जाते हैं। मधुमक्खियों को उड़ने में दिक्कत होती है, वहीं फ्रूट फ्लाई की याद्दाश्त कमजोर होने लगती है।
जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी (Journal of Experimental Biology) में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के डिजीज इकोलॉजिस्ट ओलुवास्यून अजेई (Oluwaseun Ajayi, a disease ecologist) ने बताया कि मच्छरों को खून पीने से ज्यादा सोना पसंद है। मच्छर की नींद की साइकिल को पढ़ना बेहद मुश्किल है। मच्छर सोते समय भी जागे हुए मच्छरों की तरह ही दिखते हैं। ऐसा करके वे अपनी ऊर्जा को बचाते हैं।

नींद जरूरी, खून की गंध नहीं उकसा सकी
इंडियाना की नॉट्रे डैम यूनिवर्सिटी के बायोलॉजिस्ट सैमुएल रंड (Samuel Rund, a mosquito circadian biologist at the University of Notre Dame in Indiana) ने बताया कि एक प्रयोग के दौरान तीन प्रजातियों के मच्छर एडीस एजिप्टी, क्यूलेक्स पिपिएंस और एनोफिलीज स्टेफेंसी को कांच के डिब्बों में बंद कर दिया। इनके अंदर कैमरा और इंफ्रारेड सेंसर्स लगे थे। इन मच्छरों ने दो घंटे बाद सोना शुरू कर दिया। वहीं कुछ मच्छरों को एक कांच के ट्यूब्स में रखा था। इसमें कुछ मिनट में कंपन होता था, ताकि वे सो न सकें। इन मच्छरों को 4-12 घंटे तक सोने नहीं दिया। बाद में इन सभी मच्छरों को एक कांच के बर्तन मे डाला गया और उसमें इंसान ने अपना पैर रख दिया। इसके बाद देखा गया कि जो मच्छर आराम से सोए थे, उन्होंने इंसान के पैर पर हमला कर दिया। वहीं जिन मच्छरों की नींद पूरी नहीं हुई थी, वे चुपचाप सोने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें खून की गंध उकसा नहीं पा रही थी।

बीमारियों की रोकथाम के लिए अध्ययन
वैज्ञानिक सालों से बीमारियों की रोकथाम के लिए मच्छरों के सोने और जागने का समय तय करने वाली जैविक घड़ी का अध्ययन कर रहे हैं। अध्ययन से पता चला, मच्छर अब दिन में भी ऐसी बीमारियां फैला रहे हैं, जो पहले वे केवल रात के समय फैलाते थे। इससे साफ हो गया कि उनके सोने और जागने के टाइम टेबल बिगड़ गया है।