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दूध महंगा : राजस्थान में अब गधों को दूध 1500 रुपए लीटर

अब तक केवल भारी सामान ढोने में काम आने वाले गधे सौंदर्य निखार रहे हैं। गर्दभ के दूध का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों में किया जा रहा है। इसके दूध में एंटी ऑक्सीडेंट,एंटी माइक्रोबियल तथा एंटी रिंकल तत्वों की मौजूदगी पाए जाने के बाद कंपनियों ने इसका उपयोग बड़े स्तर पर शुरू कर दिया है।

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अब तक केवल भारी सामान ढोने में काम आने वाले गधे सौंदर्य निखार रहे हैं। गर्दभ के दूध का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों में किया जा रहा है। इसके दूध में एंटी ऑक्सीडेंट,एंटी माइक्रोबियल तथा एंटी रिंकल तत्वों की मौजूदगी पाए जाने के बाद कंपनियों ने इसका उपयोग बड़े स्तर पर शुरू कर दिया है।

गर्दभ दूध की डिमांड समझते हुए अब पशुपालक डंकी मिल्क डेयरी लगाने में रुचि दिखा रहे हैं। इसके लिए देश के कई राज्यों के पशुपालकों ने बीकानेर स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में प्रशिक्षण लिया है। जिसमें गधों का रखरखाव, दूध उत्पादन बढ़ाने के तरीकों के बारे में बताया गया।

डेढ़ किलोग्राम तक दूध उत्पादन

एक ***** एक दिन में आधे से डेढ़ लीटा तक दूध देता है। उसके खानपान पर भी विशेष ध्यान देना होता है। इसके दो थन होते हैं। इसे हाथ से दुहा जा सकता है। मशीन लगा कर भी दूध निकाला जाता है।

इन राज्यों के पशुपालकों ने लिया प्रशिक्षण

केंद्र में कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान के तीस पशुपालकों ने डंकी मिल्क डेयरी खोलने का प्रशिक्षण लिया है। 18 अक्टूबर से एक और शिविर आयोजित होगा।

डंकी मिल्क का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों में लिया जा रहा है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में डंकी मिल्क डेयरी भी खुलने लगी है। हिसार स्थित केंद्र में दूध से साबुन तक बनाया गया था।

डॉ. राम अवतार लेघा, प्रभारी, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र बीकानेर

डंकी डेयरी खोलने के लिए गत दिनों केंद्र में प्रशिक्षण लिया था। अब अच्छी कदकाठी वाले गधों की तलाश की जा रही है। इसका दूध 1500 रुपए प्रति किलो तक बिकता है। ज्यादा दूध देने वाले गधों की कदकाठी के आधार पर कीमत तय होती है।

अनिल बागोरिया, जयपुर निवासी प्रशिक्षणार्थी

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