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दुग्धदान: राजस्थान की महिलाएं बनी यशोदा

रक्तदान के लिए उत्साह अब चरम पर है और कई संस्थाएं इसमें योगदान दे रही हैं। लोग भी रक्तदान के लिए जागरूक हुए हैं, वहीं दुग्धदान का उत्साह भी अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। शहरों में न सही, गांवों में यशोदाएं इसके लिए खुल कर सामने आ रही हैं। सरकारी स्तर पर जोधपुर में मदर मिल्क बैंक साकार नहीं हो सका, लेकिन लव-कुश संस्था इसके लिए कार्य कर रही है।

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Mother Milk Bank

मदर मिल्क बैंक

रक्तदान के लिए उत्साह अब चरम पर है और कई संस्थाएं इसमें योगदान दे रही हैं। लोग भी रक्तदान के लिए जागरूक हुए हैं, वहीं दुग्धदान का उत्साह भी अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। शहरों में न सही, गांवों में यशोदाएं इसके लिए खुल कर सामने आ रही हैं। सरकारी स्तर पर जोधपुर में मदर मिल्क बैंक साकार नहीं हो सका, लेकिन लव-कुश संस्था इसके लिए कार्य कर रही है।

इस संस्था ने पिछले 13 माह में 13 शिविर लगा कर महिलाओं को दुग्धदान के लिए प्रेरित करते हुए अपने साथ जोड़ा है। नवजात बच्चे को यदि उसकी मां दुग्धपान नहीं करवा पाती तो उसको अन्य धात्री मां से दुग्धपान करवाया जाता है। जोधपुर में लव-कुश मदर मिल्क बैंक इस प्रकार की सेवाएं दे रहा है। कोई महिला यदि दुग्धदान करती है तो उसे संस्था छह माह तक संरक्षित रखती है व नि:शुल्क उपलब्ध करवाती है।

मुहिम बने तो माताओं के आंसू न निकलें

संस्थान में आए दिन कई जरूरतमंद माताएं पहुंचती हैं और मजबूरी में दूध के लिए गुहार लगाती हैं। ऐसे में दुग्धदान भी मुहिम बने तो मदर मिल्क बैंक खाली न रहे और किसी मां को खाली हाथ न लौटना पड़े।

गांव-गांव में लगाए जा रहे शिविर

लव कुश संस्था के प्रभारी राजेन्द्र परिहार बताते हैं कि पिछले साल मार्च माह में मदर मिल्क बैंक शुरू किया। कुछ दिन बाद गांव-गांव जाकर शिविर लगाने शुरू किए। उपकरणों के जरिए दुग्ध एकत्र कर छह माह तक संग्रहित रखा जाता है। संस्था बहुत बेहतर तरीके से काम कर रही है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में उत्प्रेरित करने का लक्ष्य है।