
जयपुर। देश भर में मिसाल के तौर पर राजस्थान में एक मई से शुरू की गई मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के उदृदेश्य को कुछ निजी अस्पताल पलीता लगाने में जुटे हैं। अब तक दर्जनों अस्पतालों ने इस योजना में स्वीकृत होने के बावजूद या तो इलाज शुरू नहीं किया है या कैशलेस इलाज करने में आनाकानी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार चिकित्सा विभाग और विभिन्न राजनीतिक दलों के पास भी इसकी सैकड़ों शिकायतें मिल चुकी हैं। हालांकि सरकार का दावा है कि अब तक इस योजना में करीब 20 हजार लोग कैशलेस इलाज का लाभ उठा चुके हैं, लेकिन कुछ जिलों में तो पिछली भामाशाह योजना का पैसा अटका होने के कारण भी अस्पताल इससे बचने की कोशिश कर रहे हैं।
50 हजार जमा करवाओ, तब करेंगे भर्ती
जयपुर के एक निजी अस्पताल में मंगलवार परिजन एक मरीज को चिरंजीवी योजना में कैशलेस इलाज के लिए लेकर पहुंचे। वहां उन्हें कहा गया कि 50 हजार रुपए जमा करवाने होंगे। अब न तो परिजन आर्थिक रूप से इतने सक्षम थे और न ही वे इतना पैसा साथ लेकर गए थे। पैसा जमा कराने से पहले उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि वे वापस मिलेंगे या नहीं। बाद में उन्हें कहा गया कि बीमा कंपनी से हरी झंडी मिलने के बाद उन्हें पैसे लौटाए जाएंगे। तब तक उन्हें पैसा जमा कराने के बाद ही आईसीयू मिलेगा। बाद में बमुश्किल 20-25 हजार रुपए जमा करवाने पर उनकी बात मानी गई।
कार्ड के बावजूद एक लाख खर्च
विज्ञान नगर निवासी लज्जावती तंवर को 8 मई को इन्द्रा विहार स्थित अधिकृत ओपेरा अस्पताल में भर्ती कराया। उनका 11 मई तक इलाज चला। अस्पताल के विंडो पर मुख्यमंत्री चिंरजीवी योजना की पॉलिसी का कार्ड तो दिया, लेकिन अस्पताल ने योजना लागू नहीं होने का हवाला देकर उन्हें योजना में लाभ नहीं दिया। परिजन ने दवाओं व इलाज पर एक लाख रुपए खर्च कर दिए।
इन्हें देने पड़े 1.80 लाख
कोटा के ही सुरेन्द्र सिंह को भी 9 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनका भी कार्ड लेने से मना कर दिया। इनके इलाज में भी 1.80 लाख रुपए खर्च हो गए।
ऐसे हालात :
बीकानेर : एक भी अस्पताल ने शुरू नहीं किया इलाज
चिरंजीवी योजना में 22 अस्पतालों ने आवेदन किया है, लेकिन अभी तक 6 को ही स्वीकृति मिली है। यहां एक भी अस्पताल ने योजना में अभी कैशलेस इलाज शुरू नहीं किया है। इसका कारण भामाशाह योजना का पिछला भुगतान भी अब तक नहीं मिलना बताया जा रहा है।
जोधपुर : नोडल अधिकारियों के दखल पर बमुश्किल इलाज
योजना में 25 अस्पताल अधिकृत हैं। यहां योजना में बमुश्किल निजी अस्पतालों ने उपचार करना शुरू किया है, वह भी कई तरह के दबाव के बाद। इन अस्पतालों में जाने वाले मरीजों ने बताया कि निजी अस्पताल शुरुआत में मना करते हैं। लेकिन नोडल अधिकारियों के पास शिकायत के बाद इलाज कर रहे हैं।
झालावाड़ : 6 अस्पतालों में से 2 ने बनाई दूरी
योजना में 6 अस्पताल अधिकृत हैं। इनमें से 2 अस्पताल इलाज नहीं कर रहे हैं। इसका कारण नई योजना के कड़े नियम और कई के पिछले बकाया बताया जा रहा है।
181 पर 200 से ज्यादा शिकायतें
इधर, प्रदेश कांग्रेस ओबीसी प्रकोष्ठ के संयोजक राजेन्द्र सैन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि मुख्यमंत्री ने इस बेहतर योजना की शुरुआत की। लेकिन अभी भी कई अस्प्ताल योजना में नामांकित होने के बावजूद पैसा मांग रहे हैं। इससे संबंधित 215 शिकायतें 181 नंबर पर दर्ज हुई हैं। उन्होंने ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की मांग की।
20 हजार को मिला इलाज
इधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि मई से शुरुआत के बाद अभी तक प्रदेश में 20 हजार से अधिक लोगों को चिरंजीवी योजना के माध्यम से नि:शुल्क इलाज मिला है। उन्होंने कहा कि अभी तक जिन परिवारों ने चिरंजीवी योजना में पंजीकरण नहीं करवाया है, वो 31 मई तक अपना पंजीकरण अवश्य करवा लें। इससे महज 850 रुपये प्रतिवर्ष में 5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।
शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर
अभी तक 1 करोड़ 31 लाख परिवार इस योजना में पंजीकरण करवा चुके हैं। 31 मई तक पंजीकरण नहीं करवाने पर योजना का लाभ पाने के लिए 3 महीने का इंतजार करना पड़ेगा। यदि कोई अस्पताल चिरंजीवी योजना से जुड़े होने के बावजूद योजना के अंतर्गत इलाज से मना करे तो 18001806127 पर शिकायत दर्ज कराएं।
शिकायत पर करेंगे कार्रवाई
प्रदेश में चिरंजीवी योजना के तहत अब तक 20 हजार लोगों को कैशलेस इलाज मिल चुका है। जो नहीं कर रहे हैं, उनकी शिकायत मिलने पर जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री
एक पैसा नहीं देना है, कोई मांगता है तो शिकायत करें
राजस्थान स्टेट हैल्थ इंश्योरेंस एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणा राजोरिया से सवाल-जवाब
सवाल : चिरंजीवी योजना में अभी भी कुछ निजी अस्पताल पैसा मांग रहे हैं ?
जवाब : कोई ऐसा कर रहा है तो वह गलत है, इसकी शिकायतों पर हम कार्रवाई करेंगे।
सवाल : नियम क्या बनाया है?
जवाब : चिरंजीवी योजना पूरी तरह कैशलेस है। इसमें उपचार के जो पैकेज निर्धारित किए गए हैं, उनका एक पैसा किसी अस्पताल को नहीं देना है, वह बीमा कंपनी चुकाएगी।
सवाल : अब तक जो शिकायतें आई, उन पर कार्रवाई हुई?
जवाब : अभी योजना शुरू हुई है, जो शिकायतें आ रही हैं, उनकी जांच करवा रहे हैं। आवश्यक होगा तो कार्रवाई भी होगी।
Published on:
27 May 2021 03:33 pm
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