भोपाल. प्रदेश में शराबबंदी होनी चाहिए, साथ ही शराब की आदत छुड़ाने के इंतजाम होने चाहिए। , लेकिन शहर में सरकारी मदद से चलने वाले पांच नशामुक्ति केंद्र लम्बे समय से बंद पड़े हैं। इस सेंटरों पर सिर्फ दो से ढाई हजार रुपया खर्चा आता था। जबकि, आज प्राइवेट सेंटर इससे पांच गुना ज्यादा रुपए वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं इन सेंटरों में से एक सेंटर बाल नशामुक्ति केंद्र भी था। इन सेंटरों के बंद होने से बाल कल्याण समिति को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांधी भवन मे प्रदेश का पहला नशामुक्ति केंद्र 'नवजीवनÓ चला करता था। भारत सरकार से अनुदान प्राप्त यह केंद्र 22 साल चलने के बाद पिछले तीन साल से बंद पड़ा है। शहर का पहला केंद्र होने के नाते इस पर नशा छुड़वाने के लिए आने वालों की काफी भीड़ रहती थी। बच्चे और बड़े इस सेंटर पर आते थे। बंद होते समय भी यहां का खर्चा मात्र 2 से ढाई हजार रुपए के बीच था, क्योंकि यहां सिर्फ खाने का रुपया लिया जाता था। इस केंद्र में बड़ी संख्या में लोग नशे से उबर चुके हैं, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। आज इस सेंटर में फोटो गैलरी बन गई है। दूसरा केंद्र 10 नम्बर स्टाप पर शांति निकेतन के नाम से संचालित होता था। तीसरा केंद्र हर्षवर्धन कॉलोनी, चौथा पुतली बाई बस स्टैंड के पास काउंसलिंग सेंटर और पांचवां बच्चों के लिए बाल नशामुक्ति केंद्र था, जो वहीं बस स्टैंड के पीछे चला करता था।