
अमेरिका के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो: ANI)
Diego Garcia Trump Issue: हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे 'डिएगो गार्सिया' (Diego Garcia Military Base) को लेकर वैश्विक राजनीति में उबाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए (Trump UK Mauritius Treaty) समझौते की तीखी आलोचना करते हुए इसे अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। ट्रंप का यह रुख न केवल ब्रिटेन के लिए सिरदर्द बन गया है, बल्कि भारत के लिए भी हिंद महासागर (Indian Ocean Security) में सुरक्षा समीकरणों को बदलने वाला साबित हो सकता है। दरअसल, 2025 में ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक संधि हुई थी, जिसके तहत चागोस द्वीप समूह (जिसमें डिएगो गार्सिया शामिल है) की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने पर सहमति बनी। बदले में, ब्रिटेन को अगले 99 वर्षों तक डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के संचालन का अधिकार मिला। जो बाइडन प्रशासन ने इस समझौते का समर्थन किया था, लेकिन ट्रंप ने इसे 'कमजोर कूटनीति' करार देते हुए ब्रिटेन की आलोचना की है।
भारत के लिए यह मुद्दा बहुत संवेदनशील है। हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्ग सीधे तौर पर डिएगो गार्सिया की स्थिरता से जुड़े हुए हैं।
सुरक्षा चिंताएं: भारत हमेशा से हिंद महासागर को बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप से मुक्त रखना चाहता है। अगर ट्रंप यह समझौता पलटते हैं या सैन्य अड्डे पर सीधा नियंत्रण बढ़ाते हैं, तो इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
चीन का फैक्टर: ट्रंप का तर्क है कि मॉरीशस को द्वीप सौंपने से वहां चीन का प्रभाव बढ़ सकता है। भारत भी मॉरीशस का करीबी सहयोगी है और चागोस पर मॉरीशस के दावे का समर्थन करता रहा है। ऐसे में ट्रंप की नाराजगी भारत-अमेरिका और भारत-मॉरीशस संबंधों के बीच एक नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर सकती है।
ट्रंप ने न केवल हिंद महासागर बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में भी अपनी पकड़ मजबूत करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड को "विश्व सुरक्षा के लिए अभिन्न" बताते हुए डेनमार्क और ब्रिटेन पर 25% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका को इन रणनीतिक क्षेत्रों पर पूर्ण नियंत्रण चाहिए।
ब्रिटेन सरकार: ब्रिटिश संसद में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि क्या ट्रंप के दबाव में संधि को रद्द करना चाहिए। हालांकि, लेबर पार्टी की सरकार फिलहाल संधि पर कायम है।
भारतीय रक्षा विशेषज्ञ: रणनीतिकारों का कहना है कि "ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति हिंद महासागर में भारत की 'सागर' (SAGAR) पहल के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है, क्योंकि ट्रंप किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को अपनी शर्तों पर बदलने के लिए तैयार हैं।"
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप जल्द ही दावोस (स्विट्जरलैंड) में नाटो महासचिव मार्क रुट्टे और यूरोपीय नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में डिएगो गार्सिया और ग्रीनलैंड मुख्य एजेंडा होंगे। 1 फरवरी, 2026 से टैरिफ लागू होने की समयसीमा के कारण यूरोपीय देशों में हड़कंप मचा हुआ है।
बहरहाल, इस विवाद का एक कानूनी पहलू 'चार्गोसियंस' (द्वीप के मूल निवासी) का भी है। कई दशकों से निर्वासन झेल रहे इन लोगों को उम्मीद थी कि मॉरीशस के पास संप्रभुता जाने से वे अपने घर लौट पाएंगे। ट्रंप के हस्तक्षेप से इन मानवाधिकारों पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
Published on:
20 Jan 2026 03:54 pm

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