24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हवामहल में मुस्लिम मतदाता ज्यादा, फिर किशनपोल से टिकट क्यों

टिकट के लिए जातिगत समीकरण दिखाने लगे दावेदारपूर्व महापौर ने किया सवाल

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Umesh Sharma

Jun 30, 2018

jyoti

हवामहल में मुस्लिम मतदाता ज्यादा, फिर किशनपोल से टिकट क्यों

प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसे लेकर दावेदार अभी से दमखम दिखा रहे हैं। इसी बीच किशनपोल विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट दावेदार पूर्व महापौर ज्योति खण्डेलवाल ने इसी सीट से मुस्लिम को टिकट देने पर सवाल उठाए हैं।


खण्डेलवाल ने मुस्लिम वोटरों की संख्या के आधार पर दावा किया है कि हवामहल और आदर्श नगर में किशनपोल के मुकाबले मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है, फिर भी किशनपोल से मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट क्यों दिया जाए। आदर्श नगर विधानसभा में 91 हजार 515, हवामहल में 90 हजार 711 और किशनपोल विधान सभा में 76 हजार 912 मुस्लिम मतदाता हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद जयपुर की 8 विधानसभा सीटो में से दो सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया गया। लेकिन दोनों ही सीटों पर बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दे दिया गया नतीजा दोनों ही सीटों पर विरोध हुआ और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। खण्डेलवाल शीघ्र ही आलाकमान तक अपनी बात आकड़ों के साथ पहुंचाएगी ताकि इन आंकड़ों के आधार पर टिकट वितरण किया जाए।


तीन बार हार का दिया तर्क
खण्डेलवाल ने कहा है कि किशनपोल विधानसभा सीट से कांग्रेस द्वारा अब तक तीन बार मुस्लिम प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया गया है और तीनों ही बार कांगेस को हार का सामना करना पड़ा है। शाह इकरामुद्दीन, अश्क अली टांक और अमीन कागजी को इस सीट से हार मिली है। जबकि 1998 में जौहरी बाजार सीट से तकीउद्दीन अहमद ने भाजपा के कद्दावर नेता और चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ को शिकस्त दी थी। उस समय शहर की केवल एक ही सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा गया था।

एक सीट से मुस्लिम को टिकट देने की मांग
विधानसभा चुनावों में इस बार शहर की 8 सीटों में से एक ही सीट से मुस्लिम और एक ही राजपूत उम्मीदवार खड़ा करने की मांग जोर पकड़ रही है। कार्यकर्ता इस संबंध में कई बार पार्टी नेताओं को अपनी बात भी पहुंचा चुके हैं। परिसीमन के बाद हुए 2008 और 2013 के चुनावों में कांग्रेस ने दो मुस्लिम, दो राजपूत को टिकट दिए थे। दोनों चुनावों में मुस्लिम को हार का सामना करना पड़ा, 2008 में एक राजपूत प्रत्याशी ने जीत दर्ज की, जबकि 2013 में दोनों प्रत्याशियों को ही हार का सामना करना पड़ा।