
सरसों के दामों में तेजी गायब, किसान निकाल रहे पुराना स्टॉक
देशभर की मंडियों में करीब 2.50 लाख बोरी नई सरसों की आवक होने और किसानों की और से स्टॉक में रखी पुरानी सरसों की बिकवाली चलने के कारण मंडियों में लगातार इसके दाम टूटते जा रहे है। दूसरी तरफ, तेल मिलों की मांग घटने से भी स्थानीय तेल तिलहन बाजार में सरसों सीड और टूट गई। तीन-चार दिन के अंतराल में सरसों सीड में करीब 500 रुपए प्रति क्विंटल निकल चुके हैं। जयपुर मंडी में सरसों मिल डिलीवरी 42 प्रतिशत तेल कंडीशन के भाव 6700 रुपए प्रति क्विंटल से भी कम रह गए हैं। जानकारों के मुताबिक आगे भी सरसों में तेजी के आसार नहीं के बराबर हैं। समर्थन पाकर एगमार्क सरसों तेल भी लुढ़क गया है। सोयाबीन रिफाइंड एवं मूंगफली तेल में भी गिरावट का रुख देखा जा रहा है।
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विदेशी तेलों में उतार-चढ़ाव से सरसों में और मंदी के आसार
सरसों तेल कारोबारी अनिल चतर के अनुसार सरसों का बिजाई रकबा बढ़ने तथा स्टॉकिस्टों की बिकवाली के कारण इन दिनों सरसों सीड में मंदी का रुख बना हुआ है। सरसों तेल का पर्याप्त उठाव नहीं होने की वजह से सरसों सीड में नरमी देखी जा रही है। विदेशी तेलों में उतार-चढ़ाव होने तथा ऊंचे भावों में ग्राहकी कमजोर होने से सरसों सीड में और मंदी के आसार व्यक्त किए जाने लगे हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सहित देश की विभिन्न मंडियों में सरसों सीड की आवक वर्तमान में ढाई लाख बोरी प्रतिदिन बताई जा रही है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी किए जाने के कारण किसानों का रुझान सरसों की बिजाई की तरफ बढ़ा है। जानकार बताते हैं कि मौसम अनुकूल होने के कारण इस साल देश में सरसों का उत्पादन अधिक होने की संभावना है। यहीं कारण है कि स्टॉक को देखते हुए आने वाले समय में सरसों एवं इसके तेल में तेजी के आसार बहुत कम हैं।
Published on:
14 Dec 2022 03:59 pm
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