
अच्छी पैदावार के लिए इस विधि से कर सकते हैं खेती
जयपुर
Method of mustard cultivation : इन दिनों रबी सीजन की फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। रबी सीजन की फसलों गेहूं, जौ, चना, सरसों के साथ अन्य की बिजाई में किसान जुटे हुए हैं। सरसों प्रमुख तिहलन फसल है, जो किसानों की आमदनी का एक अच्छा स्त्रोत है। ऐसे में सरसों की बुवाई के समय किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है ताकि किसान सरसों की खेती कर अच्छा उत्पादन कर सकें। अगर उत्पादन अच्छा होगा तो निश्चित रूप से किसानों को इससे फायदा होगा। सरसों की बुवाई की एक सामान्य विधि है श्री विधि। इससे सरसों की खेती करने पर किसान ज्यादा पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। दरअसल, रबी सीजन में ज्यादातार किसान सरसों की बुवाई सामान्य तरीके से ही करते हैं। लेकिन किसान चाहें तो ज्यादा उत्पादन के लिए श्री विधि से सरसों की बुवाई कर सकते हैं। इस विधि की खास बात यह है कि इससे बुवाई करना ज्यादा कठिन नहीं होता है। इस विधि से किसान रबी सीजन में आसानी से सरसों की बुवाई कर सकते हैं। इस विधि से बुवाई करते समय किसानों को बीज का चुनाव, बीज की मात्रा, बीज का उपचार समेत अन्य कई महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।
बीज की मात्रा का रखें ध्यान
विशेषज्ञों के मुताबिक श्री विधि से सरसों की बिजाई करने में किसी खास किस्म के बीज की जरूरत नहीं होती है। किसान चाहें तो अपने क्षेत्र की स्थितियों के हिसाब से बीज का चयन कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसान नए बीज का इस्तेमाल करने के साथ ही विकसित बीज का उपयोग भी बिजाई में कर सकते हैं।
सरसों की बुवाई के समय बीज की मात्रा का भी ध्यान रखना जरूरी है। अगर सरसों की किस्म अधिक दिनों वाली है तो बीज की मात्रा कम लगेगी। यदि सरसों की किस्म कम दिनों में उपज देनी वाली है तो बुवाई में बीज की मात्रा ज्यादा लगेगी।
बुवाई से पहले बीज का उपचार
बीज की बुवाई से पहले बीज का उपचार करना बेहद जरूरी होता है। यह अधिक उत्पादन के लिए जरूरी होता है। बीज का उपचार कर लेने से फसल में किसी भी तरह का रोग लगने से प्रारंभिक तौर पर रोका जा सकता है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक किसान बीज की मात्रा के हिसाब से दोगुना पानी लें। बीज को गुनगुने पानी में भिगोए। फिर हल्के और ऊपर तैर रहे बीजों कों बाहर कर दें। इसके बाद गुनगुने पानी में बीज के साथ ही गोमूत्र, गुड़ और वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर छह से आठ घंटे तक के लिए छोड़ दें। बीज को तरल पदार्थ से अलग करके दो ग्राम बाविस्टीन या कार्बेण्डाजिम दवाई मिलाकर सूती कपड़े में बांधकर पोटली बनाकर इन्हें अंकुरित होने तक के लिए छोड़ दें। सामान्यतया बीज 12 से 18 घंटे में अंकुरित हो जाते हैं। बीज के अंकुरित होने के बाद इसे नर्सरी में दो गुना दो इंच की दूरी में आधा इंच गहराई में डाल दें। सरसों की बुवाई के समय एक खास बात यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसान जिस खेत में सरसों की रोपाई करने जा रहे हैं, वहां नमी होनी चाहिए।
Published on:
11 Nov 2019 03:27 pm
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