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नगर निगम व एनएस पब्लिसिटी की साठगांठ का फुटओवर ब्रिज, शहर परेशान

अनुबंधित फर्म को करोड़ों की कमाई का 'खेलÓ  

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jaipur

नगर निगम व एनएस पब्लिसिटी की साठगांठ का फुटओवर ब्रिज, शहर परेशान

जयपुर. राहगीरों को सड़क हादसे से बचाने के लिए बनाए गए फुटओवरब्रिज का उपयोग चांदी कूटने के लिए किया जा रहा है। टोंक रोड की व्यस्त सड़क हिस्से में नारायण सिंह सर्किल और टोंक फाटक एस्केलेटर युक्त फुटओवरब्रिज बनाए गए हैं, लेकिन दोनों ही जगह एस्केलेटर बंद हैं। इससे राहगीरों को मजबूरन एस्केलेटर पर भी सीढिय़ां चढ़कर जाना पड़ रहा है। खासकर वृद्धजन व असहाय लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। ऐसे हालात में मजबूरन लोगों को दौड़ते वाहनों के बीच ही सड़क से गुजरना पड़ रहा है। दोनों ही जगह हर दिन सैकड़ों राहगीरों की आवाजाही होती है। जबकि अनुबंधित फर्म एनएस पब्लिसिटी इनफुटओवरब्रिज पर विज्ञापन के जरिए हर साल करोड़ों रुपए कमा रही है। कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए निगम अफसरों ने भी आंखें मूंद ली हैं। राजस्थान पत्रिका ने इसका जायजा लिया तो परेशान करने वाली हकीकत सामने आई।
अजमेरी गेट से सांगानेर फ्लाईओवर तक सौंदर्यीकरण के लिए 2006 से 2021 तक 15 साल का करार एनएस पब्लिसिटी के साथ किया गया। बीओटी आधार पर जेडीए द्वारा एनएस पब्लिसिटी को कार्यादेश दिया। इसके बाद नगर निगम के पास आ गया। इस रूट पर बस शैल्टर्स, फुट ओवरब्रिज, गैन्ट्रीज, सुलभ शौचालय संचालन-सफाई कार्य शामिल है। फर्म इन पर विज्ञापन कर हर साल करोड़ों रुपए कमा रही है। जबकि, निगम को सालाना करीब 90 लाख रुपए ही मिल रहे हैं।

2 जगह बंद, 1 हिस्सा भी दिखावटी
यहां तीन जगह से प्रवेश-निकाय द्वार हैं, लेकिन दो जगह तो एस्कलेटर कई दिनोंं से बंद है। रामबाग से नारायण सर्किल की तरफ वाले फुटओवरब्रिज वाले हिस्से में एस्केलेटर चलता मिला तो सही लेकिन इसके लिए भी गार्ड को मशक्कत करनी पड़ी। बीच-बीच में अटकता रहा, जिसे संचालित करने के लिए गार्ड को जद्दोजहद करनी पड़ी। जबकि, बस स्टेण्ड की तरफ दोनों छोर पर ही एस्केलेटर बंद कर दिए गए। एक तरफ के एस्केलेटर पर धूल-मिट्टी व गंदगी जमा थी। शायद इसका रखरखाव कई दिन से नहीं हुआ है।

चढ़ो एस्केलेटर से, उतरो सीढिय़ों से
यहां सड़क के दोनों छोर से फुटओवरब्रिज पर चढऩे-उतरने की सुविधा है, लेकिन एस्केलेटर एक तरफ ही संचालित मिला। दूसरी तरफ एस्के लेटर बंद कर दिया गया, जिससे उतरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वृद्धजन टोंक फाटक वाले हिस्से की तरफ से एस्केलेटर से चढ़ तो गए लेकिन जब केन्द्रीय विद्यालय वाले हिस्से की तरफ से उतरने लगे तो एस्केलेटर बंद मिला। यह देख वे परेशान हो गए और धीरे-धीरे उतरना पड़ा। रखरखाव नहीं होने से यहां दोनों ही तरफ एस्केलेटर में आवाज आती रही। इससे भी राहगीर डरते हुए गुजरते रहे।

बिजली का बिल बचा रहे
एस्केलेटर संचालन में विद्युत खपत बहुत ज्यादा होती है। इसे बचाने के लिए फर्म एनएस पब्लिसिटी एस्केलेटर का संचालन ही बंद कर देती है। जब हल्ला होता है तो उस दिन फिर से दिखावटी संचालन शुरू कर दिया जाता है। खुद राहगीरों ने कई बार निगम प्रशासन को इसकी जानकारी दी है।

पता नहीं अफसर क्यों नहीं देते ध्यान
हर दिन यहां से गुजरती हूं, लेकिन यह मशीन कभी-कभी ही चालू मिलती है। यहां बैठे गार्ड को भी कहा पर जैसा चलता आ रहा है वैसे ही आज भी हो रहा है। वाहनों के बीच सड़क पार नहीं करनी पड़े, इसलिए ही तो इसका उपयोग कर रही हूं।
सम्पत देवी

शोरूम पर जाने लिए यहीं से गुजरना हूं। ज्यादातर तो एस्केलेटर बंद मिलता है। पता नहीं, अफसर इस पर ध्यान क्यों नहीं देते। एक तरफ से एस्केलेटर से चढ़ जाओ लेकिन दूसरी तरफ पहुंचो तो उतरते समय घुटनों पर दबाव पड़ता है।
पी.सी. शर्मा

लोगों की सहुलियत के लिए एस्केलेटर युक्त फुटओवरब्रिज बनाया, लेकिन संचालन करने वालों को हमारी चिंता नहीं है। जब भी गुजरो खराब ही मिलता है। काफी दिन बाद एक तरफ संचालित मिला, लेकिन यह भी बंद हो जाएगा।
राजेन्द्र कुमार

फुटओवरब्रिज जनता की सुविधा के लिए है। यदि वहां लोगों को असुविधा हो रही है तो यह ठीक स्थिति नहीं है। राजस्व जुटाना अलग काम है और जन सुविधा अलग। मौके पर जांच कर एक्शन भी लिया जाएगा।
नवीन भारद्वाज, उपायुक्त (राजस्व), नगर निगम


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