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जेडीए ही नहीं, निगम में भी ‘डिस्कस’ का खेल, महिनों तक लंबित पड़ी रहती है फाइलें

CS Sudhansh Pant: सीएस सुधांश पंत के औचक निरीक्षण को लेकर जेडीए के साथ दोनों नगर निगमों में भले ही हलचल मच गई हो, लेकिन जेडीए ही नहीं, नगर निगमों में भी फाइलों में 'डिस्कस' का खेल चल रहा है। यहां भी फाइलों में 'डिस्कस' लिखकर अटकाया जा रहा है।

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जयपुर। सीएस सुधांश पंत के औचक निरीक्षण को लेकर जेडीए के साथ दोनों नगर निगमों में भले ही हलचल मच गई हो, लेकिन जेडीए ही नहीं, नगर निगमों में भी फाइलों में 'डिस्कस' का खेल चल रहा है। यहां भी फाइलों में 'डिस्कस' लिखकर उन्हें अटकाया जा रहा है। बड़ी बात तो यह है कि कई फाइलें गुम तक हो जाती है, जिनके खोज पत्र निकालकर 'खानापूर्ति' की जा रही है।

जेडीए के साथ ग्रेटर नगर निगम और हैरिटेज नगर निगमों में खासकर जमीन के पट्टों, नाम हस्तांतरित प्रकरण, कॉलोनियों के नियमन की फाइलें कई महिनों तक लंबित पड़ी रहती है। कई बार फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल पर बार—बार घूमती रहती है। जबकि आवेदक बार—बार चक्कर काटता रहता है। प्रशासन शहरों के संग अभियान में पिछले कांग्रेस सरकार ने भले ही एक दिन में मकान का पट्टा जारी करने का दावा किया, लेकिन हकीकत यह है कि अभियान के दौरान आवेदन करने के बाद भी लोगों को अभी तक पट्टे नहीं मिले हैं। वहीं जेडीए में कॉलोनियों के नियमन को लेकर भी कई प्रत्रावलियां लंबित चल रही है।

निगम के फाइलें 'गुम' होने का खेल
जानकारों की मानें तो निगमों में फाइलों को इधर—उधर करने का भी खेल होता है। जब तक फाइलों पर 'वजन' नहीं होता है, तब तक फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंची ही नहीं है। फाइलों को गुम तक कर दिया जाता है। इसके बाद आवेदक प्रयास करता है तो खोज पत्र निकालकर खानापूर्ति की जाती है।

सालों से एक ही सीट पर टिके है 'बाबू'
जानकारों की मानें तो नगर निगम में सबसे अधिक 'खेल' आयोजन, राजस्व शाखा के साथ जोन कार्यालयों में होता है। यहां कई कार्मिक लंबे समय से एक ही सीट पर लगे हुए है, ऐसे में उन्हें सब तरह की बारिकियां पता है। लिपिक स्तर पर सांठगांठ का 'खेल' होता है।

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जेडीए ने अब निकाले आदेश
सीएस के दौरे और फाइलों की पेंडेंसी से नाराज होने के बाद जेडीए प्रशासन हरकत में आया और अब आदेश निकालने पड़े। जेडीए प्रशासन ने सभी प्रकोष्ठ व जोन उपायुक्तों को निर्देशित किया है कि डिस्कस किए जाने से संबंधित लंबित पत्रावलियों पर समय पर उच्च अधिकारियों से चर्चा कर उनको अगले 24 घंटे में निस्तारित करेंगे। साथ ही जिस दिन पत्रावली प्राप्त हुई है, उसी दिन अपेक्षित कार्रवाई करेंगे। लंबित पत्रावलियों का निस्तारण 24 घंटे में करेंगे।