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Rajasthan Panchayat Elections : नए आदेश के बाद चिकित्सा कर्मी नाराज, फरवरी का वेतन बिल रोका गया, संघ ने जताया विरोध

Rajasthan Panchayat Elections : राजस्थान पंचायत आम चुनाव-2026 की तैयारियों के बीच चिकित्सकों में नाराजगी सामने आई है। चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण फरवरी का वेतन बिल भी रोक दिया गया है। आरएमसीटीए ने आपत्ति जताई है। जानें पूरा क्या है मामला?
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जयपुर

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Sanjay Kumar Srivastava

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Updated: 6 Mar 2026, 7:29 AM IST

Rajasthan Panchayat Elections Medical staff angry after Jaipur District Collector order February salary bill stalled RMCTA angry

Rajasthan Panchayat Election (फोटो - AI)

Rajasthan Panchayat Elections : राजस्थान पंचायत आम चुनाव-2026 की तैयारियों के बीच चिकित्सकों में नाराजगी सामने आई है। जिला निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर) जयपुर की ओर से जारी आदेश के तहत चुनाव ड्यूटी के लिए समस्त राज्य कर्मचारियों से सूचना प्रपत्र भरवाया जा रहा है। पहली बार एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं उससे जुड़े अस्पतालों के चिकित्सकों को भी यह प्रपत्र अनिवार्य रूप से भरने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण फरवरी का वेतन बिल भी रोक दिया गया है। इसे लेकर राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (आरएमसीटीए) ने आपत्ति जताई है और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

ड्यूटी पंजीकरण के लिए बाध्य करना अतार्किक - डॉ. धीरज जेफ

आरएमसीटीए के अध्यक्ष डॉ. धीरज जेफ ने मुख्यमंत्री भजनलाल को भेजे पत्र में कहा कि चिकित्सा कर्मियों को चुनाव ड्यूटी के लिए पंजीकरण के लिए बाध्य करना अतार्किक और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान चिकित्सकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की थी, ऐसे में उन्हें अतिरिक्त प्रशासनिक दायित्वों के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।

संघ ने यह भी दावा किया है कि केन्द्रीय चुनाव आयोग की ओर से चिकित्सा कर्मियों को चुनाव ड्यूटी से छूट दी गई है, इसके बावजूद उनसे सूचना प्रपत्र भरवाना और वेतन बिल रोकना समझ से परे है।

विभाग को दिशा-निर्देश देने को कहा

आरएमसीटीए ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस मामले में संबंधित विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि चिकित्सकों को अनावश्यक प्रक्रिया से राहत मिल सके और उनका लंबित वेतन जारी किया जा सके।

चिकित्सकों का कहना है कि अस्पतालों में पहले ही मरीजों का दबाव बना रहता है, ऐसे में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े औपचारिक कार्यों में उन्हें उलझाना स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर डाल सकता है।

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