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भारत आने के 191वें दिन बाद ही कूनो में नामीबियाई मादा चीता साशा ने दम तोड़ा

देश में चीतों की आबादी बढ़ाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। पिछले साल सितंबर में नामीबिया से मध्य प्रदेश में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए आठ चीतों में से एक मादा चीता साशा की भारत आने के 191वें दिन बाद ही सोमवार सुबह 8.30 बजे मौत हो गई।

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भोपाल/श्योपुर. देश में चीतों की आबादी बढ़ाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। पिछले साल सितंबर में नामीबिया से मध्य प्रदेश में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए आठ चीतों में से एक मादा चीता साशा की भारत आने के 191वें दिन बाद ही सोमवार सुबह 8.30 बजे मौत हो गई। वह वह किडनी के संक्रमण ये पीडि़त थी। उसे छोटे बाड़े में रखकर उपचार किया जा रहा था। बताया गया है कि नामीबिया में ही साशा की किडनी में संक्रमण पाया गया था। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (पीसीसीएफ ) जे. एस. चौहान ने बताया कि मॉनिटरिंग दल ने 22 जनवरी को साशा को सुस्त पाया था। इसके बाद उसकी देखरेख के लिए डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम बनाई गई। साशा का ब्लड सैंपल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान स्थित लैब भेजा गया। जांच में पता चला कि उसके गुर्दों में संक्रमण है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 17 सितंबर को आठ नामीबियाई चीतों को कूनो में छोड़ा था। नामीबियाई विशेषज्ञ डॉ. इलाई वॉकर लगातार साशा की मॉनीटरिंग कर रहे थे। साशा की बीमारी को लेकर 18 फरवरी को भी दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों डॉ. लॉरी मार्कर, डॉ. एड्रियन टोर्डिफ, डॉ. एंडी फेजर, डॉ. माइक और फिन्डा गेम के साथ चर्चा की गई थी।
फाउंडेशन से लिया थ इलाज का रेकॉर्ड
पीसीसीएफ चौहान ने बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिकों और कूनो प्रबंधन ने चीता कंजर्वेशन फाउंडेशन, नामीबिया से साशा के इलाज का रेकॉर्ड लिया तो पता चला था कि 15 अगस्त 2022 को साशा में क्रियेटिनिन का स्तर 400 से अधिक पाया गया था। मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार साशा का नामीबिया में ऑपरेशन भी हो चुका था।

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