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Nandghar scheme: 7 सालों से 13 जिलों में सिमटी थी नंदघर योजना

Nandghar scheme: — अब हर जिले में आंगनबाड़ी केंद्र होंगे विकसित — केंद्रों को मिला भामाशाहों का साथ — 25 हजार आंगनबाड़ी केंद्र बनेंगे नंदघर
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जयपुर

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Tasneem Khan

Feb 10, 2022

Nandghar scheme was confined to 13 districts for 7 years

Nandghar scheme was confined to 13 districts for 7 years

Nandghar scheme:

राज्य में साल 2015 में शुरू की गई नंदघर योजना अब जाकर धरातल पर आने की उम्मीद बंधी है। महिला एवं बाल विकास विभाग और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के एमओयू के तहत अब 25 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में नंदघर डवलप किए जाएंगे। इससे पहले 11 मई 2015 पूर्व महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल ने पाली से ‘नन्द घर योजना’ का शुभारम्भ किया था। इस योजना के तहत प्रदेश में सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में भामाशाहों के सहयोग से नंदघर बनाए जाने थे। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की सहायि काओं को भामाशाहों को योजना से जोड़ने के लिए टारगेट भी दिए गए थे, लेकिन सहयोग ना मिलने से यह योजना आगे नहीं चल पाई और नंदघर विकसित नहीं हो पाए। सात सालों में सिर्फ 13 जिलाें में 1300 नंदघर शुरू हो पाए। अब नए एमओयू होने के बाद जल्द ही 25 हजार अन्य केंद्रों में नंदघर की सेवाएं महिलाओं और बच्चों को मिलने लगेंगी।

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यह हैं योजना के उद्देश्य
नंदघर योजना का उद्देश्य गर्भवती महिला तथा गर्भावस्था से 6 वर्ष की आयु तक के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, विद्यालय पूर्व शिक्षा के साथ सम्पूर्ण विकास के लिए संसाधनों के साथ उन्नयन लाना है। इससे मातृ मृत्यु दर और बाल मृत्यु दर में कमी लाने के साथ-साथ कुपोषण जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है। योजना के तहत भामाशाह, एनजीओ व कारपोरेट संस्थाओं को आंगनबाड़ी केन्द्र गोद देने के लिए चार प्रस्ताव रखे जाने का प्रावधान किया हुआ है। इसके तहत भामाशाह आंगनबाड़ी केन्द्र के भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध करा सकता है। केन्द्र के लिए भवन का निर्माण या चारदीवारी बनवा सकता है। केन्द्र के रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष 10 हजार का आर्थिक सहयोग व केन्द्र को आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र के रूप में विकसित कर सकते हैं।

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यह हुआ है एमओयू
राज्य के 25 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को नंद घर के रूप में विकसित करने के लिए 8 फरवरी को वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल फाउण्डेशन के साथ राजस्थान सरकार ने एमओयू किया है। राज्य सरकार की ओर से प्रमुख शासन सचिव महिला एवं बाल विकास श्रेया गुहा और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की ओर से नंदघर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितु झींगन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। फाउंडेशन करीब 750 करोड़ रूपए खर्च कर 25 हजार नंद घर विकसित करेगा। प्रति आंगनबाड़ी 3 लाख रूपए विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे।

आंगनबाड़ी केंद्रों में आएगा सुधार
अभी राज्य में 62 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से आधे से ज्यादा केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं। कई भवन तो इतने छोटे हैं कि बच्चों का इनका लाभा नहीं मिल पाता। अब नंदघर योजना के तहत चयनित आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन निर्माण भी किया जाएगा। इसके बाद इनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे मातृ एवं शिशु मृत्युदर को और कम करने में भी मदद मिलेगी।

इनका कहना है
गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं एवं बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नंदघर योजना से प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास में मदद मिलेगी।
ममता भूपेश, महिला एवं बाल विकास मंत्री