
इंदिरा गांधी फीडर नहर के पास और हरियाणा सीमा पर बसे टिब्बी तहसील के इस गांव में पिछले पांच सालों के दौरान कैंसर से अनेक ग्रामीणों की मृत्यु हो चुकी है वही अनेक कैंसर पीडितों की अभी भी दवा चल रही है। ग्रामीणों में इस रोग को लेकर उस समय चर्चा अधिक मुखर हो जाती है जब गांव में किसी कैंसर पीडित महिला अथवा पुरूष की मौत होती है। ऐसे समय में ग्रामीण इस रोग के कारण व बचाव के उपायों पर मंथन करने में जुट जाते है। लेकिन जैसे ही कैंसर पीडित की मौत हुए कुछ अरसा बीतता है। एकबारगी फिर से ग्रामीण इस रोग की भयावहता को भूल कर अपने कार्यो में जुट जाते है।
आसपास के गांवो की अपेक्षा इस गांव में कैंसर रोगियों में गांव की महिला व पुरूष समान रूप से पीड़ित रहे है। चार हजार की आबादी व पांच सौ घरो वाले इस गांव के ग्रामीणों के अनुसार पिछले पांच वर्ष से इस रोग से मरने वालों की संख्या दर्जनों में है।जिनमें कई परिवारों में तो दो से अधिक जनें इस रोग से पीडित होकर काल का ग्रास बन चुके है। जब कि अनेक ग्रामीण अभी इस रोग से पीडित है। इस रोग से पीडित ग्रामीणों की जयपुर तथा बीकानेर से दवाएं चल रही है। हालांकि गरीब तबके के पीडितों को इलाज के लिए इन नगरों में जाना काफी हद तक संभव नही हो पाता जिसके चलते उन्हे उचित इलाज भी नही मिल पाता। गांव में इस रोग से पीडित ग्रामीणों की संख्या में बढोत्तरी होने के साथ चिकित्सा महकमें में भी कुछ हलचल हुई है । पिछले माह गांव में केंसर जांच शिविर भी आयोजित किया गया था।
आपकों बता दे कैंसर के रोग की जानकारी मरीज व उसके परिजनों को अंतिम स्टेज में मिलती है जिसके कारण उसका समुचित इलाज नही हो पाता है। वहीं ग्रामीण इस रोग के पीड़ित होने पर उसका प्रचार भी नही करते तऔर मरीज को भी कैंसर की बीमारी की बात छिपा कर रखी जाती है। ताकि मरीज समय से पहले हौंसला न छोड दें।
Updated on:
07 Nov 2019 12:20 pm
Published on:
07 Nov 2019 11:58 am
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