
राजस्थान की राजनीति में भले ही पक्ष-विपक्ष के बीच तीखे वार-पलटवार का दौर चलता रहता हो, लेकिन रविवार की शाम जयपुर में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। अवसर था राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की सुपुत्री के विवाह का, जहाँ वैचारिक मतभेदों को किनारे रखकर भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता एक ही मंच पर नजर आए।
जयपुर के एक निजी मैरिज गार्डन में आयोजित इस शाही समारोह ने राजस्थान की 'अपनायत' और राजनीतिक सौहार्द की एक नई मिसाल पेश की। विवाह समारोह में भाजपा सरकार के मुखिया से लेकर विपक्ष के तमाम बड़े चेहरों ने शिरकत की। यहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी ने सभी का ध्यान खींचा, जो वर-वधू को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देने पहुंचे थे।
समारोह में जैसे ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहुंचे, खुद टीकाराम जूली ने उनकी अगवानी की। मंच पर मुख्यमंत्री ने वर-वधू को पुष्प गुच्छ भेंट कर आशीर्वाद दिया।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी अपनी उपस्थिति से समारोह की गरिमा बढ़ाई। दोनों ही नेताओं ने वर-वधू के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की।
शादी समारोह में भाजपा के अन्य कद्दावर नेता भी पीछे नहीं रहे। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी समारोह में शिरकत की। अक्सर विपक्षी कांग्रेस के नेताओं को घेरने वाले ये नेता यहाँ बेहद सहज और मुस्कुराते हुए नजर आए।
कालीचरण सराफ और वासुदेव देवनानी: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और वरिष्ठ विधायक कालीचरण सराफ ने भी जूली परिवार की खुशियों में हिस्सा लिया।
समारोह में पक्ष और विपक्ष के विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पदाधिकारियों की इतनी बड़ी संख्या थी कि यह एक 'लघु विधानसभा' जैसा प्रतीत हो रहा था। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और सचिन पायलट सहित कई नेताओं ने जूली परिवार को बधाई दी।
इस समारोह से पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल है, जिसमें भाजपा सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा और टीकाराम जूली एक साथ राजस्थानी गानों पर थिरकते नजर आए। धुर-विरोधी माने जाने वाले इन नेताओं का यह अंदाज बताता है कि राजस्थान की राजनीति में 'व्यक्तिगत संबंध' दलीय सीमाओं से ऊपर हैं।
यह विवाह समारोह प्रदेश की जनता के लिए एक बड़ा संदेश लेकर आया है। जहाँ सोशल मीडिया और रैलियों में आरोप-प्रत्यारोप का स्तर गिरता जा रहा है, वहीं जयपुर की इस शाम ने यह साबित किया कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और व्यक्तिगत रिश्तों में अपनापन आज भी राजस्थान की पहचान है।
Published on:
16 Feb 2026 11:24 am
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