जयपुर। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नई शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार हो ही गया। अब शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव होंगे। मोदी सरकार की दूसरी पारी की शुरुआत के साथ ही पहले दिन नई शिक्षा नीति का प्रारूप पेश किया गया। नई शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए अंतरिक्ष विज्ञानी के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में गठित समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को अपनी रिपोर्ट दी। गौरतलब है कि 2014 में मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति बनाने की घोषणा की थी, लेकिन वह पांच साल में तैयार नहीं हो सकी। अब मंत्री निशंक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 का प्रारूप जारी कर दिया है। इस पर आमजन के सुझाव 30 जून तक मांगे हैं। करीब 600 पन्नों में यह तैयार की गई है। इस नीति के लागू होने से शिक्षा में व्यापक बदलाव होंगे।
वर्ष 2025 तक 6 साल तक की आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए मुफत, सुरक्षित, उच्च गुणवत्तापूर्ण और विकासात्मक स्तर के अनुरूप शिक्षा की पहुंच की जाएगी। इस शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा आदि प्रमुख विषय होंगे।
ये होंगे बदलाव
इस शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा के अधिकार में बदलाव होगा अब 6 से 14 के बजाय यह 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए होगा। साथ ही पांचवीं तक की पढ़ाई भी मातृभाषा में होगी। जानकारी के अनुसार अब हर राज्य में एक राज्य विद्यालय नियामक प्राधिकरण स्थापित होगा। बोर्ड अपना पाठयक्रम तय नहीं कर सकेंगे। स्कूल शिक्षा निदेशालय का सभी निजी स्कूलों पर भी अधिकार होगा। कुछेक प्रमुख बदलाव यहां बताए गए हैं, बदलाव और भी होंगे।
कुछेक प्रमुख बदलाव
— कक्षा 1 से 5 तक का पाठयक्रम और समय सारणी फिर से तैयार होगी।
— आंगनबाड़ियों को प्राथमिक स्कूलों के साथ जोड़ा जाएगा।
— पूर्व प्राथमिक शालाओं को प्राथमिक स्कूलों के साथ जोड़ा जाएगा।
— आदिवासी समुदाय के बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर रहेगा।
— ट्रांसजेडर बच्चों का डेटा बेस तैयार कर उनकी शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
— सामान्य स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाया जाएगा।
— गंभीर विकलांग बच्चों के लिए घर पर ही शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।