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‘केंचुली’ से मुक्त हुई लाछी को नहीं मिला कहीं मुकाम

स्माइल एंड हॉप और थर्ड बेल संस्था की और से रवींद्र मंच पर आयोजित किए जा रहे राजस्थान के पहले नेशनल इंटिमेट थिएटर फेस्टिवल 'रंगनाट्यम 'में शनिवार को रवींद्र मंच पर विजयदान देथा की कहानी पर आधारित नाटक 'कैंचुली' का मंचन किया गया । नार्थ जोन कल्चरल सेंटर के सहयोग से आयोजित इस नाटक का निर्देशन जयपुर के युवा निर्देशक अभिषेक झांकल ने किया ।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jan 07, 2023


जयपुर। स्माइल एंड हॉप और थर्ड बेल संस्था की और से रवींद्र मंच पर आयोजित किए जा रहे राजस्थान के पहले नेशनल इंटिमेट थिएटर फेस्टिवल ‘रंगनाट्यम ‘में शनिवार को रवींद्र मंच पर विजयदान देथा की कहानी पर आधारित नाटक ‘कैंचुली’ का मंचन किया गया । नार्थ जोन कल्चरल सेंटर के सहयोग से आयोजित इस नाटक का निर्देशन जयपुर के युवा निर्देशक अभिषेक झांकल ने किया ।
नाटक का कथासार
सांप एक सरपट दौडऩे वाला जीव है पलक झपकते ही रेंगते हुते नजरों से ओझल हो जाता है, लेकिन केंचुली में लिपटा सांप केंचुली के आडंबर के कारण चाहकर भी टस से मस नहीं हो पाता। नाटक कहता है कि हम इंसान भी ना जाने ऐसी कितनी अदृश्य केंचुलियों के आडंबर में जकड़े हैं। समाज, रीति रिवाज,रिश्ते नाते, मान, मर्यादा जाने कितने बंधन। अगर ये बंधन ना हो तो क्या मानव स्वच्छंद हो सकता है ? लाछी गूजरी भी तो ऐसी ही कितनी ही केंचुलियों के बंधन में थी । जब रीति रिवाज, मान मर्यादा की केंचुली के बंधन में बंधने के बाद भी मन को शांति न तो न बंधनों का क्या फायदा । उसने कुटुम्बपरस्ती की केंचुली उतारने में ही अपनी मुक्ति समझी, लेकिन केंचुली के बंधन से मुक्त होने के बाद भी लाछी को ना मुकाम मिला ना विश्राम।

 

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नाटक में लाछी की भूमिका में यशिका, भोजा की भूमिका में विशाल भट्ट, ठाकुर की भूमिका में कपिल शर्मा और गुर्जर की भूमिका में महमूद अली थे। भोजा की चहेतियों की भूमिका झिलमिल और रिचा ने निभाई और गांव वालों की भूमिका में विजय बंजारा और विकास थे। नाटक में प्रकाश व्यवस्था गगन मिश्रा और सेट व्यवस्था आसिफ शेर अली और शाहरुख खान की रही । नाटक का संगीत पक्ष स्वयं निर्देशक अभिषेक झांकल संभाला।
समारोह के अंतिम दिन रविवार को तपन भट्ट लिखित और सौरभ भट्ट निर्देशित नाटक उनकी चिठ्ठियों का मंचन होगा ।