National Sports Day : राजस्थान में ऐसी एक-दो नहीं, बल्कि कई खेल शख्सियतें हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत और लगन के साथ एक मुकाम हासिल किया है। इन शख्सियतों ने हर विपरीत चुनौतियों का सामना किया और राष्ट्रीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की चैम्पियनशिप में मैडल जीतकर देश का मान बढ़ाया।
जयपुर।
विश्व में भारत का नाम रोशन करने वाले महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के दिन मंगलवार 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है। राज्यपाल कलराज मिश्र, सीएम अशोक गहलोत, खेल मंत्री अशोक चांदना और राज्य क्रीड़ा परिषद् अध्यक्ष कृष्णा पूनिया के साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री व जयपुर ग्रामीण सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने प्रदेश के खिलाड़ियों और नागरिकों को इस ख़ास दिन की शुभकामनाएं दी हैं।
राज्य सरकार और राज्य क्रीड़ा परिषद् की ओर से प्रदेश भर में विभिन्न खेल आयोजनों के ज़रिये राष्ट्रीय खेल दिवस को जोश और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इन सब के बीच इस दिन राजस्थान के उन शख्सियतों की चर्चा हो रही है जिन्होंने अपनी खेल प्रतिभा के दम पर देश का विश्व पटल पर रोशन किया है।
राजस्थान में ऐसी एक-दो नहीं, बल्कि कई खेल शख्सियतें हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत और लगन के साथ एक मुकाम हासिल किया है। इन शख्सियतों ने हर विपरीत चुनौतियों का सामना किया और राष्ट्रीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की चैम्पियनशिप में मैडल जीतकर देश का मान बढ़ाया।
मौजूदा या सक्रिय राजनीति की बात की जाए तो राजस्थान के तीन नेता ऐसे हैं जो खेल के मैदान से राजनीति की पिच पर भाग्य आजमाने आये थे। भाग्य ऐसा चमका, कि एक 'खिलाड़ी' को तो केंद्र की मोदी सरकार की कैबिनेट में मंत्री पद तक का ओहदा नसीब हुआ, जबकि दो खिलाड़ियों में से एक राजस्थान की गहलोत सरकार में खेल मंत्री है और एक अन्य खिलाड़ी राज्य क्रीड़ा परिषद् में चेयरमेन पद पर काबिज़ हैं।
राज्यवर्धन सिंह राठौड़
खेल से राजनीति में आने वाले सबसे सफल खिलाड़ी हैं राज्यवर्धन सिंह राठौड़। राठौड़ एक वक्त में निशानेबाजी के खेल में बेहतरीन डबल ट्रेप शूटर रहे, जिन्होंने वर्ष 2004 ओलंपिक्स में हिन्दुस्तान को सिल्वर मेडल दिलवाया। राठौड़ ने अपने पूरे खेल जीवन में देश को 7 बार अंतर्राष्ट्रीय गोल्ड मैडल भी दिलवाए हैं। इसके बाद उन्होंने राजनीति में एंट्री ली और भाजपा पार्टी का दामन थाम लिया।
जयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से लोकसभा का टिकट मिला और जीत हासिल हुई। वर्ष 2014 में उन्हें मोदी सरकार में सूचना एवं प्रसारण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय के राज्य मंत्री का जिम्मा दिया गया। इसके बाद वर्ष 2017 में खेल एवं युवा मामलात मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार की भी ज़िम्मेदारी दी गई। फिलहाल वे भाजपा के सबसे ख़ास सांसदों में से एक हैं और राष्ट्रीय प्रवक्ता की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं।
कृष्णा पूनिया
गहलोत सरकार के इस कार्यकाल में राज्य क्रीड़ा परिषद् की चेयरमेन का ज़िम्मा संभाल रहीं डॉ कृष्णा पूनिया भी खेल से राजनीति में आने वाली शख्सियत हैं। चूरू की सादुलपुर विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बनने से पहले कृष्णा पूनिया दो दफा वर्ष 2008 और 2012 के दौरान ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अपने खेल करियर के दौरान पूनिया ने कई बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है। यही वजह रही कि उन्हें अर्जुन अवार्ड से लेकर पद्मश्री सम्मान तक से नवाज़ा जा चुका है।
अशोक चांदना
गहलोत सरकार में खेल मंत्री अशोक चांदना भी राजनीति में आने से पहले खिलाड़ी रहे हैं। राजनीति में आने के बाद भी उनका खेल प्रेम कम नहीं हुआ है। मंत्री होने के बाद भी वे पोलो टूर्नामेंट्स में शामिल होते नज़र आते हैं। चांदना अपने नाम की पोलो टीम के कप्तान भी हैं। राजनीति में उतरने से पहले अपने खेल करियर में अशोक चांदना स्विमिंग और क्रिकेट में भी बेहतरीन खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।वर्ष 2001 में 200 मीटर की बैक स्ट्रोक स्विमिंग चैम्पियनशिप हो, या वर्ष 2008 से 2010 तक भीलवाड़ा क्रिकेट टीम में क्रिकेटर की भूमिका हो, और अब पोलो मैदान में प्रदर्शन हो, चांदना का खेल के मैदान से शुरू हुआ जुड़ाव आज तक कायम है।
दिलचस्प फ्लैशबैक
दिलचस्प बात तो ये भी है कि एक वक्त ऐसा भी आया जब खेल से राजनीति में उतरने वाली दो शख्सियतें चुनावी मैदान में आमने-सामने उतरीं। दो पूर्व ओलंपियन राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और कृष्णा पूनिया वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान जयपुर ग्रामीण सीट से प्रतिद्वंदी रहे। इस मुकाबले में राज्यवर्धन ने कृष्णा पूनिया को शिकस्त दी थी।