
भारतीय नौसेना का निशान शुक्रवार को औपनिवेशिक अतीत से निकलकर पूरी तरह भारतीय रंग में रंग गया। इसके साथ ही क्रॉस ऑफ सेंट जॉर्ज कही जाने वाली अंग्रेजों के जमाने की निशानी अतीत में समा गई। अब नौसेना के सफेद ध्वज के ऊपरी कोने पर तिरंगा और बगल में दायीं ओर नीले रंग के बैकग्राउंड में अशोक स्तम्भ तथा छत्रपति शिवाजी की राजमुद्रा के आकार में नौसेना का प्रतीक सुनहरे रंग में चमक रहा है। इसके नीचे संस्कृत में ’शं नो वरुण:’ लिखा है, जिसका अर्थ है ’वरुण देव हमारे लिए शुभ हों।’
नौसेना के निशान में आजादी के बाद यह पांचवा बदलाव है। सबसे पहले 1950 में रॉयल नेवी की जगह इंडियन नेवी बनते ही निशान से यूनियन जैक हटाकर तिरंगा लगाया गया, लेकिन सेंट जॉर्ज क्रॉस बना रहा। दूसरा बदलाव 2001 में हुआ, जब ध्वज से लाल रंग वाला क्रॉस हटाकर बगल में नीले रंग में अशोक चिह्न लगा दिया गया। नीला रंग समुद्र व आसमान में मिल जाने के कारण यह नजर नहीं आने की आपत्ति के बाद 2004 में फिर लाल रंग का क्रॉस जोड़कर इसके बीचों-बीच अशोक स्तम्भ लगा दिया गया। फिर 2014 में अशोक चिह्न के नीचे ही ’सत्यमेव जयते’ लिखने का बदलाव हुआ।
शिवाजी को श्रेय... भारतीय नौसेना का जन्म छत्रपति शिवाजी के वक्त माना जाता है। सत्रहवीं शताब्दी में समुद्री तटों को विदेशी हमलावरों से बचाने के लिए शिवाजी ने पहली बार करीब पांच दर्जन जंगी जहाजों और पांच हजार जवानों के साथ नौसेना बनाई। एडमिरल कान्होजी आंग्रे के नेतृत्व में शिवाजी की नौसेना ने अंग्रेजों के साथ डच व पुर्तगालियों से मुकाबला करते हुए कोंकण तट पर कब्जा किया। शुक्रवार को लॉन्च हुआ नया निशान (ध्वज) भी शिवाजी से प्रेरित है। नौसेना अरसे से आइएनएस शिवाजी और आईएनएस आंग्रे का इस्तेमाल भी करती है।
लॉर्ड माउंटबेटन ने सुझाया था निशान
भारत के वॉयस राय और गवर्नर जनरल रहे लॉर्ड लुइस माउंटबेटन के 1 मई, 1949 के पत्र में सेनाओं के नाम के आगे लगा 'रॉयल' शब्द हटाकर 'भारतीय' लिखने तथा क्राउन हटाकर अशोक स्तम्भ का निशान लगाने के साथ अन्य सुझाव दिए गए थे। नौसेना के झंडे के संबंध में माउंटबेटन का सुझाव था कि राष्ट्रमंडल देशों की सभी नौसेनाएं यूनियन जैक लगे रेड क्रॉस वाले सफेद रंग के ध्वज का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए यूनियन जैक की जगह तिरंगा लगाकर बदला जा सकता है, लेकिन रेड क्रॉस बरकरार रखा जाना चाहिए।
Published on:
03 Sept 2022 04:38 pm
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