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चालान पेश करने में बरती जा रही लापरवाही, छूट रहे अपराधी

क्राइम रिकॉर्ड सुधारने में लापरवाही पड़ रही भारी: एक मामले में कोर्ट ने फैसले की प्रति डीजीपी को भेजने के दिए आदेश

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जयपुर

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Abrar Ahmad

Oct 31, 2019

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जयपुर. आरोपियों को पकडऩे में पुलिस ने भारी मशक्कत की, लेकिन जांच करने के बाद कोर्ट में चालान पेश करने में बड़ी लापरवाही कर दी। एेसे में आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई। ऐसे ही एक मामले में तो कोर्ट ने फैसले की प्रति पुलिस महानिदेशक को भी भेजने के आदेश दिए हैं, ताकि अधिकारियों की लापरवाही उनके सामने भी आ सके। प्रदेश भर में इस तरह के मामले देखने को मिल रहे हैं।

केस १: चालान पेश करना ही भूल गए
शिवदासपुरा थाना इलाके में 3 जून 2019 को बलात्कार का मामला दर्ज हुआ। शिवदासपुरा थाना पुलिस ने मामले का चालान 7 सितंबर 2019 को पेश किया गया। थानाधिकारी ने कोर्ट में लिखित में चालान पेश में भूल का हवाला देते हुए माफी भी मांगी।
क्या कहा कोर्ट ने: थानाधिकारी को किया तलब मामले में पुलिस की लापरवाही का हवाला देते हुए आरोपियों ने कोर्ट से जमानत मांग ली। निचली अदालत के मना करने पर आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील लगाई। हाईकोर्ट ने थानाधिकारी को कोर्ट में तलब भी किया। कोर्ट ने लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए कानून का हवाला देते हुए आरोपियों को जमानत पर छोडऩे का आदेश दिया। कोर्ट ने आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक को भी भेजी है ताकि अधिकारियों की लापरवाही पता चल सके।

केस २: चालान ही अधूरा पेश किया

कानोता पुलिस ने बायोडीजल के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में नवीन पंवार को 19 जून 2019 को गिरफ्तार किया। जांच के बाद 13 सितंबर को महानगर मजिस्ट्रेट क्रम 24 में चालान पेश किया। कोर्ट ने इस अपूर्ण मानते हुए लौटा दिया। इसके बाद भी 16 सितंबर और 20 सितंबर को फिर से कोर्ट में चालान पेश किया लेकिन इस बार भी अधूरा चालान कोर्ट के सामने पेश कर दिया गया।
क्या कहा कोर्ट ने: पुलिस बने जिम्मेदार
तय अवधि में चालान पेश नहीं करने की वजह से अभियुक्त ने जमानत के लिए आवेदन किया। निचली कोर्ट के जमानत नहीं देने पर अभियुक्त की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई। जिसमें जिसमें जस्टिस पंकज भंडारी ने साफ किया की अधूरा चालान पेश करने को यह नहीं कहा जा सकता कि पुलिस की जिम्मेदारी पूरी हो गई। तय अवधि में कोर्ट के सामने चालान की प्रति ऑन रिकार्ड होनी चाहिए ऐसा नहीं होने पर यह माना जाएगा कि चालान पेश नहीं हुआ है।
क्या है कानून
सीआरपीसी की धारा 167 दो के अनुसार मृत्यु दंड, आजीवन कारावास या दस साल से ज्यादा दंडनीय अपराध में 90 दिन में चालान पेश करना होता है। ऐसा नहीं होने पर आरोपी को जमानत का अधिकार मिल जाता है। निश्चित समय में चालान पेश नहीं होने पर आरोपी केवल इसी आधार पर जमानत का अधिकारी हो जाता है।

पत्रिका व्यू
प्रदेश में अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है। अपराधियों को जब तक सजा नहीं मिलेगी, तब तक वे एेसा करते रहेंगे। पुलिस की लापरवाही कहीं न कहीं उन्हें बचा रही है, एेसे में अपराध और फलफूल रहा है। प्रदेश में बढ़ते अपराध के कारण राज्य सरकार परेशान है। डीजीपी जिलों में जा रहे हैं, एसपी स्तर पर मॉनिटरिंग हो रही है। तब भी राजधानी की पुलिस समय पर चालान पेश नहीं कर पाती। इस रवैये को सुधारना होगा। डीजीपी को एेसे मामलों में गंभीरता से विचार कर एक्शन लेना होगा।