
जयपुर @ पत्रिका. एक केस ने पुलिस महकमे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे जांच अधिकारी की लापरवाही कहें या कुछ और... मगर अब मामले की जांच एसओजी कर रही है। मामले में पुलिस की लापरवाही ने एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बना दिया। थानों के इतने चक्कर लगवा दिए कि उसका जीना मुश्किल हो गया। मुकेश मीणा ने कोर्ट में गुहार लगाई है। मालपुरा गेट पुलिस इसकी जांच कर रही है। मुकेश ने एसओजी में शैतान सिंह मीणा, अशोक शर्मा, दिनेश पंडित, रामजीलाल, अशोक मीणा, नाथूलाल मीणा, रविन्द्र नाथ के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई मामले दर्ज करवाए हैं।
यूं पता चली हकीकत
हकीकत तब पता चली जब वर्ष 2008 में सांगानेर सदर में दर्ज मारपीट के एक मामले में मुकेश के नाम गिरफ्तारी वारंट आया और पुलिस उसे खोजते हुए गांव पहुंची। तहकीकात के बाद पता चला कि शैतान मीणा ने अपने हर जुर्म में मुकेश मीणा का नाम दर्ज करवा रखा है। ऐसा कैसे हुआ एसओजी जांच कर रही है।
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लापरवाही या मिलीभगत
शैतान सिंह ने 5 नवंबर 2008 को वारदात के बाद पकड़े जाने पर थाने में मुकेश व उसके पिता का नाम-पता लिखवा दिया। मजे की बात यह है कि मुकेश के नाम से ही शैतान को जमानत भी मिल गई। इसमें सीधे अनुसंधान अधिकारी की लापर कावाही या फिर मिलीभगत अंदेशा है।
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यह था मामला
मुकेश कुमार मीणा सवाईमाधोपुर के इसरदार चौथ बरवाड़ा का रहने वाला है। वह 1999 से जनवरी 2022 तक सहारा लखनऊ में सुरक्षा सहायक के रूप में तैनात था। गांव के ही बदमाश शैतान मीणा ने पारिवारिक रंजिश के चलते कई मामलों में मुकेश का नाम और पता लिखवा दिया। थानों में शैतान मीणा पर कई मामले दर्ज हैं।
Published on:
20 Jul 2023 11:30 am
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